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सिद्धार्थनगर में बारिश और ओलावृष्टि से 100 एकड़ फसल प्रभावित:गेहूं-सरसों गिरी, आम के बौर को भी नुकसान; किसानों ने मुआवजा मांगा

सिद्धार्थनगर में पिछले दो दिनों से बदले मौसम ने किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। 20 मार्च से शुरू हुई बारिश, तेज हवा और ओलावृष्टि का सिलसिला 21 मार्च की रात तक जारी रहा। इससे जिले के कई हिस्सों में खेती को भारी नुकसान पहुंचा है। इटवा, बिस्कोहार, खुनुवा, डुमरियागंज और बढ़नी क्षेत्रों में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। इन क्षेत्रों में करीब 100 एकड़ में खड़ी गेहूं और सरसों की फसल प्रभावित हुई है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई है। 20 मार्च को दोपहर करीब 12 से 1:30 बजे के बीच शुरू हुई बारिश अचानक तेज हो गई। जिले के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से तेज बारिश हुई, जबकि कई जगहों पर ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। तस्वीरों में देखिए गेहूं और सरसों की फसल पर बारिश का असर.. ओलों की मार से खेतों में बिछ गई फसल खासतौर पर बढ़नी और खुनुवा क्षेत्र में तेज बारिश के साथ गिरे ओलों ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। ओलों की मार से गेहूं और सरसों की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ने की आशंका है। किसानों के अनुसार, गेहूं की फसल कटाई के लिए लगभग तैयार थी। अचानक आई बारिश और तेज हवा ने फसल को झुका दिया, जबकि ओलावृष्टि ने स्थिति और गंभीर कर दी। कई खेतों में पानी भर गया है और लगातार नमी के कारण फसल के सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। किसानों का दर्द: साल भर की मेहनत पर पानी इटवा क्षेत्र के किसान रामलाल निषाद ने बताया कि “हमारी करीब तीन बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह गिर गई है। ओले पड़ने से बालियां टूट गई हैं और अब दाना निकलना मुश्किल हो गया है।” बिस्कोहार के किसान शिवकुमार यादव ने कहा कि “सरसों की फसल पहले ही तैयार थी, लेकिन तेज हवा और बारिश ने पूरी फसल को जमीन पर गिरा दिया। अब इससे कोई खास फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है।” खुनुवा के किसान महेंद्र चौधरी के अनुसार, “ओलावृष्टि ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। गेहूं के साथ दलहन और तिलहन की फसल भी प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भर गया है और फसल सड़ने लगी है। अगर मौसम जल्दी साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ जाएगा।” डुमरियागंज के किसान राजेश पांडेय ने कहा कि “कटाई के ठीक पहले आई यह बारिश हमारे लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है।” बढ़नी क्षेत्र में हालात ज्यादा गंभीर बढ़नी क्षेत्र में तेज बारिश और ओलावृष्टि के कारण बड़े पैमाने पर फसलें गिर गई हैं। कई खेतों में पानी जमा हो गया है, जिससे गेहूं और सरसों की फसल खराब होने लगी है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द धूप नहीं निकली, तो नुकसान और बढ़ सकता है। आम के बौर पर भी असर मौसम का असर सिर्फ गेहूं और सरसों तक सीमित नहीं रहा। आम के बागों पर भी इसका असर पड़ा है। तेज हवा और ओलावृष्टि के कारण आम के बौर झड़ने लगे हैं, जिससे इस साल आम की पैदावार पर भी संकट मंडराने लगा है। बागवानों का कहना है कि अगर मौसम इसी तरह खराब रहा, तो आम की फसल को भी भारी नुकसान हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पकी हुई गेहूं की फसल को 100 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है, क्योंकि गिरने के बाद दाने खराब हो जाते हैं और कटाई मुश्किल हो जाती है। वहीं हरी खड़ी फसल को 30 से 60 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका है। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां नुकसान 50 प्रतिशत से अधिक भी हो सकता है।
किसानों ने मांगा सर्वे और मुआवजा किसानों का कहना है कि इस बार मौसम ने उस समय नुकसान पहुंचाया है जब फसल पूरी तरह तैयार थी। अगर यही बारिश कुछ दिन पहले या बाद में होती तो इतना नुकसान नहीं होता। अब फसल खराब होने से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा। कई किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय पर राहत नहीं मिली, तो उन्हें कर्ज और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल जिले में घने बादल छाए हुए हैं और मौसम पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। बीच-बीच में गर्जना के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। सभी की नजरें अब आने वाले मौसम पर टिकी हैं।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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