सिद्धार्थनगर में पुलिस पर जबरन समझौता कराने का आरोप:जमीन विवाद में पीड़ित ने लगाई अधिकारियों से न्याय की गुहार

सिद्धार्थनगर में पुलिस पर जबरन समझौता कराने का आरोप:जमीन विवाद में पीड़ित ने लगाई अधिकारियों से न्याय की गुहार
सिद्धार्थनगर के त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र में एक जमीन विवाद को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। बुढ़ऊ गांव निवासी बाबूलाल ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें और उनके बेटों को थाने में बैठाकर दबाव बनाते हुए जबरन सुलह-समझौता कराया, जबकि कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में है।
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के बुढ़ऊ गांव निवासी बाबूलाल पुत्र भंडारी ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गांव की मुख्य सड़क किनारे डेड मंडी में स्थित एक मकान को लेकर उनका अयोध्या प्रसाद से विवाद चल रहा था। इस मामले में बाबूलाल ने एसडीएम न्यायालय में मुकदमा दायर किया था, जहां 6 जनवरी 2025 को फैसला उनके पक्ष में आया और मकान का स्वामित्व उनके नाम होने की पुष्टि हुई। बाबूलाल के अनुसार, न्यायालय के आदेश के बाद उन्होंने मकान खाली भी करा लिया था। आरोप है कि इसके बावजूद त्रिलोकपुर थाना पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया। बाबूलाल का कहना है कि उन्हें और उनके पुत्रों विजय व दिनेश को थाने बुलाकर कई घंटों तक बैठाया गया और मानसिक दबाव बनाकर जबरन सुलह पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए गए। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस लगातार मकान खाली करने के लिए दबाव बना रही है, जबकि कोर्ट का स्पष्ट आदेश उनके पक्ष में है। इस घटना के बाद परिवार ने खुद को असुरक्षित बताया है और उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, प्रभारी थानाध्यक्ष शिवाकांत राय ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि एसडीएम कोर्ट के फैसले के खिलाफ विपक्षी पक्ष ने मंडलायुक्त के यहां से स्टे ले लिया है, जिसके चलते स्थिति बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा कोई जबरन समझौता नहीं कराया गया। फिलहाल मामला तूल पकड़ता जा रहा है और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News

