सिद्धार्थनगर जनपद के शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत कंदवा बाजार स्थित जीण माता HP गैस एजेंसी पर गुरुवार को हालात बेहद गंभीर नजर आए। दैनिक भास्कर की टीम ने 26 मार्च को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, जहां सैकड़ों उपभोक्ता सुबह से ही गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े मिले। तेज धूप और करीब 35 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच लोग घंटों लाइन में लगे रहने को मजबूर दिखे। मौके पर पहुंची टीम ने पाया कि एजेंसी की गैस वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा अपने-अपने खाली सिलेंडर लेकर लाइन में लगे रहे, लेकिन कई घंटों के इंतजार के बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा था। सबसे बड़ी बात यह रही कि एजेंसी परिसर में न तो पर्याप्त छाया की व्यवस्था थी और न ही पीने के पानी का इंतजाम। इससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई। लाइन में लगे लोगों के सिलेंडर तक गायब पड़ताल के दौरान कई उपभोक्ताओं ने सिलेंडर चोरी होने के आरोप भी लगाए। स्थानीय निवासी कांति देवी ने बताया कि वह गैस लेने एजेंसी पहुंची थीं, लेकिन उनका सिलेंडर एजेंसी के बाहर से ही गायब हो गया। इसी तरह सनी यादव ने भी आरोप लगाया कि गैस लेने के दौरान उनका सिलेंडर चोरी हो गया। इन घटनाओं के बाद लाइन में लगे लोगों में असुरक्षा और नाराजगी साफ दिखाई दी। ‘सुबह से खड़े हैं, नंबर ही नहीं आया’ लाइन में लगी कल्पना ने बताया कि वह सुबह से एजेंसी पर खड़ी हैं, लेकिन दोपहर तक भी उनका नंबर नहीं आया। वहीं पीयूष यादव ने कहा कि वह पिछले दो दिनों से लगातार लाइन में लग रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद गैस नहीं मिल पा रही। प्रिंस यादव ने आरोप लगाया कि ओटीपी मिलने के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं दिया जा रहा, जिससे पूरी वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 5 दिन से एजेंसी के चक्कर, घर में चूल्हा ठंडा स्थानीय निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि वह पिछले पांच दिनों से गैस एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिला है। उनके घर में खाना बनाने के लिए गैस खत्म हो चुकी है और मजबूरी में लकड़ी व कंडे का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आम लोगों की परेशानी और बढ़ेगी। बुकिंग बिना ही दिखा दी डिलीवरी दैनिक भास्कर की पड़ताल में एक और गंभीर गड़बड़ी सामने आई। कंदवा क्षेत्र के निवासी राकेश ने बताया कि जब वह गैस लेने पहुंचे तो एजेंसी संचालक ने कहा कि उनके नाम पर गैस पहले ही बुक होकर वितरित की जा चुकी है। जबकि राकेश का कहना है कि उन्होंने न तो गैस बुक कराई थी और न ही सिलेंडर लिया। इसी तरह कई अन्य उपभोक्ताओं ने भी शिकायत की कि उनके पासबुक या रिकॉर्ड में गैस वितरण दिखाया जा रहा है, जबकि उन्हें वास्तव में सिलेंडर मिला ही नहीं। यह मामला गैस वितरण प्रणाली में गंभीर अनियमितताओं और संभावित फर्जी एंट्री की ओर इशारा करता है। उपभोक्ताओं का आरोप: कुछ लोगों को प्राथमिकता, बाकी परेशान स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी स्तर पर पारदर्शिता की भारी कमी है। उनका आरोप है कि कुछ चुनिंदा लोगों को प्राथमिकता देकर बाकी उपभोक्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि वितरण प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित होती, तो इतनी अफरा-तफरी की स्थिति पैदा नहीं होती। बर्डपुर में भी यही हाल, रात 10 बजे से लग रही लाइन जिले के अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। बर्डपुर स्थित HP गैस एजेंसी पर भी लंबी कतारें देखने को मिलीं। दैनिक भास्कर की टीम ने 24 मार्च की रात वहां भी पड़ताल की थी, जहां उपभोक्ता रात 10 बजे से ही लाइन में लगकर सुबह तक अपने नंबर का इंतजार करते मिले थे। यह साफ संकेत है कि समस्या केवल एक एजेंसी तक सीमित नहीं, बल्कि जिले में गैस आपूर्ति और वितरण व्यवस्था व्यापक दबाव में है। पेट्रोल-डीजल में कुछ राहत, लेकिन 10 पंप अब भी बंद हालांकि जिले में पेट्रोल और डीजल की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है। 26 मार्च को अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ईंधन की उपलब्धता बेहतर हुई, जिससे लंबी कतारों में कमी आई। इसके बावजूद जिले के करीब 10 पेट्रोल पंपों पर अभी भी सप्लाई बाधित है और वे बंद पड़े हैं। मधुकरपुर मुख्यालय स्थित HP पेट्रोल पंप पर भी पेट्रोल खत्म होने के कारण संचालन ठप मिला। प्रशासन से मांग: जांच हो, सुरक्षा बढ़े, व्यवस्था सुधरे स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस एजेंसियों की तत्काल जांच कराई जाए और वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। लोगों ने यह भी मांग की कि लाइन में लगे उपभोक्ताओं के लिए छाया, पानी और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही सिलेंडर चोरी जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। गैस संकट अब सिर्फ सप्लाई का नहीं, सिस्टम फेल होने का मामला सिद्धार्थनगर में सामने आई तस्वीर सिर्फ गैस की कमी की नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की विफलता की कहानी कह रही है। जब उपभोक्ता घंटों लाइन में लगने के बाद भी सिलेंडर न पाए, रिकॉर्ड में फर्जी डिलीवरी दिखे और चोरी की शिकायतें सामने आएं, तो सवाल सिर्फ सप्लाई पर नहीं, पूरे सिस्टम पर उठते हैं। अगर प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।

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