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साहब सस्पेंड, साइन चालू

मिथिलेश कुमार सिंह | सीवान सीवान नगर परिषद में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों के फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी (EO) अनुभूति श्रीवास्तव के कार्यकाल में जारी 76 विकास योजनाओं के वर्क ऑर्डर जांच के घेरे में हैं, जिनमें से 61 आदेशों पर ईओ के हस्ताक्षर ही फर्जी पाए गए हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों में पहले से ही निलंबित अनुभूति श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि उन्होंने केवल 15 योजनाओं को मंजूरी दी थी, शेष पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए। जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय की जांच में खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर एक ही इंजीनियर, ओम प्रकाश सुमन, को दर्जनों योजनाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई। ₹10 करोड़ की इन योजनाओं में मचे इस हड़कंप के बाद जिलाधिकारी ने सभी 76 वर्क ऑर्डर रद्द करने की अनुशंसा विभाग से की है। इसी मामले में नगर नगर विकास व आवास विभाग ने 4 अक्टूबर को अनुभूति श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया। इसी तिथि को 76 वर्क आर्डर जारी कर दिया गया है।इस वर्क आर्डर के आधार पर शहरी क्षेत्र में नाली सड़क व अन्य विकास योजनाओं से संबंधित कार्य भी विभागीय स्तर पर कराया जा रहा । लेकिन इसमें भी सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार यह हुआ है कि नगर परिषद के अभियंता ओम प्रकाश सुमन को सबसे ज्यादा वर्क आर्डर जारी किया गया। जबकि एक इंजीनियर को एक बार में तीन योजनाओं से संबंधित कार्य कराया जाना होता है और कार्य समाप्ति के बाद अन्य योजनाओं की जिम्मेदारी दी जाती है,लेकिन एक ही इंजीनियर को कई वर्क आर्डर जारी कर दिया गया और इंजीनियरों के द्वारा ठेकेदारों को रखकर कार्य कराया जा रहा है। नगर विकास व आवास विभाग के परियोजना पदाधिकारी-सह-अपर निदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर पूर्व ईओ अनुभूति श्रीवास्तव के कार्यकाल में कराए गए कार्य की जांच कराने को कहा है। इस निर्देश के आलोक में डीएम विवेक रंजन मैत्रेय ने शुक्रवार की देर शाम नगर परिषद पहुंच कर जांच की। कई तरह के फ़ाइल को भी देखा। निलंबित ईओ पर आरोप पत्र गठन के लिए उनके द्वारा किये गये प्रशासनिक चूकों व प्रशासनिक प्रावधानों के उल्लंघन से संबंधित जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने की मांग की गई है। {व्यापक फर्जीवाड़ा: नगर परिषद की 76 नई विकास योजनाओं (लागत ₹10 करोड़) की जांच में 61 वर्क ऑर्डर पर तत्कालीन ईओ के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। ​{नियमों का उल्लंघन: विभागीय नियमों के विपरीत एक ही इंजीनियर (ओम प्रकाश सुमन) को कई योजनाओं का कार्य सौंप दिया गया, जबकि नियमतः एक बार में अधिकतम तीन कार्य ही दिए जा सकते हैं। ​{ईओ का दावा: निलंबित ईओ अनुभूति श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर स्वीकार किया कि उनके द्वारा केवल 15 वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे, बाकी सभी जाली हैं। ​. छापेमारी और बरामदगी: भ्रष्टाचार के मामले में ईओ के ठिकानों पर छापेमारी के बाद अब इंजीनियर ओम प्रकाश सुमन के आवास से भी लैपटॉप और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। .​ रद्द करने की अनुशंसा: जिलाधिकारी ने जांच के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव को पत्र भेजा है। जांच के बाद डीएम ने पाया कि वर्क आर्डर जारी करने में हुई गड़बड़ी जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय द्वारा इस मामले की समीक्षा की गई और पिछले सप्ताह जांच के दौरान पाया गया कि वर्क आर्डर जारी करने में भ्रष्टाचार हुआ है। इसके बाद जिलाधिकारी ने नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव के पास 76 वर्क आर्डर को रद्द करने की अनुशंसा कर दी। इसके बाद ओमप्रकाश सुमन के आवास पर छापेमारी भी कराई गई। जहां से एक लैब टॉप व अन्य कागजात बरामद हुआ। इसी दौरान 30 दिसंबर 2025 को निलंबित कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बताया है कि 15 योजनाओं को छोड़कर शेष योजनाओं का वर्क आर्डर उनका नहीं है। उनका फर्जी हस्ताक्षर किया गया होगा। इस पत्र के बाद नगर परिषद के इंजीनियर कर्मचारी और ठेकेदारों के बीच हड़कंप मच गया है। फर्जी वर्क आर्डर के आधार पर कार्य जाने के बाद अब भुगतान भी लंबित हो जाएगा और जांच के बाद दोषी कर्मियों पर कार्रवाई भी हो सकती है।


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