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सामूहिक दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद:11 साल पहले पुराने मामले में कोर्ट का फैसला, जुर्माना भी लगाया
मऊ जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र में 11 साल पहले हुई सामूहिक दुष्कर्म, मारपीट और लूट की घटना के एक दोषी को बुधवार को कोर्ट ने 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। एससी/एसटी मामलों के विशेष न्यायाधीश एडीजे दीप नारायण तिवारी ने अभियुक्त को 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर 15 दिन के अतिरिक्त सश्रम कारावास का भी निर्णय सुनाया गया। यह घटना 4 अगस्त 2015 को हुई थी। पीड़िता ने सरायलखंसी थाने में दर्ज प्राथमिकी में बताया था कि वह अपने दोस्त यशवंत के साथ वनदेवी दर्शन-पूजन के लिए गई थी। रास्ते में एक सुनसान इलाके में ताजपुर मठिया निवासी रामाशीष शर्मा और दो अन्य अज्ञात लोगों ने उन्हें रोक लिया। विरोध करने पर यशवंत को मारा-पीटा गया, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और उसे पेड़ से बांध दिया गया। अभियुक्तों ने यशवंत के पास से पांच हजार रुपये भी लूट लिए थे। इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। मामले की प्राथमिकी पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सत्येन्द्र नाथ राय और अखिलेश कुमार सिंह ने कुल नौ गवाहों को न्यायालय में पेश कर अभियोजन कथानक को साबित किया। इस मामले में 3 सितंबर को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, जिस पर संज्ञान लिया गया। 6 अप्रैल 2016 को इस मामले में आरोप तय किए गए थे। एससी/एसटी मामलों के विशेष न्यायाधीश एडीजे दीप नारायण तिवारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी रामाशीष शर्मा को पीड़िता को साधारण चोट पहुंचाने और बंधक बनाने का दोषी पाया। कोर्ट ने इन आरोपों में छह-छह माह के कारावास और एक-एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। लूट के आरोप में दोषी को 10 वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया। साथ ही सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को बीस वर्ष के कठोर कारावास, दस हजार अर्थदंड की सजा सुनाया। मामले की विवेचना के उपरांत आरोपी समेत दो अन्य नाबालिग के विरुद्ध चार्ज प्रस्तुति किया। इस दौरान अवयस्क आरोपियों का मामला अलग कर किशोर न्याय बोर्ड में विचारण के लिए भेजा गया।
Sourse: Dainik Bhaskar via DNI News

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