सहारनपुर के थाना मिर्जापुर के ब्लॉक सढौली कदीम की ग्राम पंचायत खुशहालपुर के मजरा फरकपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास के दावों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। यहां एक 30 वर्षीय युवक राहुल की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार सिर्फ इसलिए नहीं हो पा रहा, क्योंकि बारिश थमने का इंतजार किया जा रहा है। राहुल, जो लंबे समय से बीमार था, उसकी मौत बीती रात करीब 2 बजे हो गई। घर में मातम पसरा है, लेकिन दुख से भी बड़ी परेशानी यह है कि परिजन शव को अंतिम विदाई नहीं दे पा रहे। वजह, गांव के श्मशान घाट पर न तो शव दाह गृह है और न ही कोई टीन शेड, जिससे बारिश में अंतिम संस्कार संभव हो सके। गांव के लोग बताते हैं कि सरकार द्वारा श्मशान घाटों के विकास के लिए बजट और निर्देश दिए जाने के बावजूद फरकपुर में हालात जस के तस हैं। खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना ही एकमात्र विकल्प है, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने इस विकल्प को भी खत्म कर दिया है। मजबूरी में परिजन और ग्रामीण बारिश रुकने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि राहुल को अंतिम विदाई दी जा सके। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहां घर में रो-रोकर परिजनों का बुरा हाल है, वहीं दूसरी ओर गांव के लोग सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जीते जी तो सुविधाएं नहीं मिलीं, अब मरने के बाद भी सम्मानजनक विदाई नसीब नहीं हो रही। इतना ही नहीं, श्मशान घाट तक पहुंचने वाला रास्ता भी बेहद खराब है। ग्रामीणों के मुताबिक, रास्ता इतना संकरा और जर्जर है कि चार लोग मिलकर शव को सही तरीके से ले भी नहीं जा सकते। कई बार लोगों को पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है, जो बारिश में और भी खतरनाक हो जाती हैं। ग्राम प्रधान अकरम पर ग्रामीणों ने गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई बार श्मशान घाट में बुनियादी सुविधाओं के लिए शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सवाल यह उठता है कि जब सरकार श्मशान घाटों के लिए विशेष योजनाएं चला रही है, तो फिर फरकपुर जैसे गांव इन योजनाओं से अछूते क्यों हैं?

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