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सहरसा बरियाही गौशाला पर प्रशासन-संगठनों में बनी सहमति:स्थायी व्यवस्था के लिए 15 जनवरी तक का समय निर्धारित

सहरसा के बरियाही स्थित गौशाला में गौवंश संरक्षण और स्थायी व्यवस्था को लेकर प्रशासन और विभिन्न संगठनों के बीच सहमति बन गई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सहरसा सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) श्रेयांश तिवारी से शनिवार को मुलाकात कर लिखित आवेदन सौंपा। बैठक में SDO श्रेयांश तिवारी ने 15 जनवरी 2026 तक स्थायी व्यवस्था तय करने की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है। इस सहमति के बाद गौवंश संरक्षण से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी की जाएंगी। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 15 जनवरी 2026 तक सभी गौवंश को थाना परिसर में ही सुरक्षित रखा जाएगा। गौवंश को किसी अन्य स्थान पर नहीं ले जाया जाएगा प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद गौवंश को सीधे थाना परिसर से बरियाही गौशाला में स्थानांतरित किया जाएगा। इस दौरान गौवंश को किसी अन्य स्थान पर नहीं ले जाया जाएगा। यह निर्णय SDO की जवाबदेही के अंतर्गत लिया गया है। गौशाला का विधिवत संचालन शुरू होने तक एक योग्य और जिम्मेदार स्वयंसेवक (वॉलंटियर) की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। यह स्वयंसेवक गौवंश की नियमित देखभाल, चारा-पानी, भोजन, छत और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। साथ ही, गौशाला परिसर की सुरक्षा, बाउंड्री और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखेगा। गौशाला की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एस्टेट जियो अधिकारी द्वारा लिखित आवेदन और स्पष्ट आश्वासन दिया गया है। इसी आधार पर प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। दूध, घी, गोबर, खाद, गौमूत्र के पैसों से संचालन और संरक्षण बैठक में यह भी तय हुआ कि गौशाला से प्राप्त दूध, घी, गोबर, खाद, गौमूत्र जैसे उत्पादों से होने वाली आय, साथ ही समाज, हिंदू संगठनों और स्वयंसेवकों द्वारा गौशाला के नाम पर एकत्र की गई राशि का उपयोग केवल गौशाला संचालन और गौवंश संरक्षण में ही होगा। किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। गौशाला का संचालन शुरू होने के बाद भविष्य की व्यवस्था, संचालन और जवाबदेही तय करने के लिए सभी के सहयोग से एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इस पूरी पहल को गौवंश संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम और सामूहिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।


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