सहारनपुर में सहकारी बैंक कर्मचारियों ने वेतनमान और बकाया भुगतान सहित अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज उठाई है। रविवार को को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आंदोलन करेंगे। यूनियन ने भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अजय बर्मन ने रविवार को कर्मचारियों के लिए उचित वेतनमान लागू करने और वर्ष 2012 से 2017 के बीच भर्ती हुए कर्मचारियों के बकाया भुगतान की मांग की। यह जानकारी रेलवे रोड स्थित जिला सहकारी बैंक कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान दी गई। अजय बर्मन और प्रदेश वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य अमित सैनी ने बताया कि केंद्रीय कार्यकारिणी के निर्देश पर प्रदेश के 50 जिला सहकारी बैंकों में एक साथ बैठकें और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं। इसका उद्देश्य वर्षों से लंबित मांगों को जल्द पूरा करने के लिए दबाव बनाना है। यूनियन नेताओं ने उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी वजह से जिला सहकारी बैंकों को भारी नुकसान हुआ है और पिछले चार वर्षों से कर्मचारियों तथा बैंकों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सहकारिता राज्य मंत्री के निर्देश पर एक समिति का गठन किया गया था, जिसमें यूनियन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया। हालांकि, वेतनमान और प्रबंधन लागत से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है और न ही कोई आदेश जारी किया गया है। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले 16 वर्षों में कंप्यूटरीकरण और आधुनिकीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए,लेकिन बैंकों की स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। संगठन ने वर्ष 2012 से 2017 तक भर्ती कर्मचारियों के बकाया भुगतान,चीनी मिलों के वित्त पोषण में अनियमितताओं और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की भी मांग की। यूनियन ने अपनी तीन प्रमुख मांगें सभी कर्मचारियों को समान और उचित वेतनमान,समिति में सहमत हुए प्रस्तावों को तत्काल लागू कर आदेश जारी किया जाए।

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