औरैया के श्री राम सेवक सावित्री देवी इंटर कॉलेज केशमपुर में सर्पदंश से बचाव और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।यह आयोजन 4 यूपी बटालियन एनसीसी के एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट पीयूष कृष्णा,डॉ. राम मनोहर लोहिया शिक्षा एवं ग्रामोद्योग सेवा संस्थान और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण औरैया के तत्वावधान में हुआ।कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स सहित आम नागरिकों को सर्पदंश के प्रति जागरूक किया गया। लेफ्टिनेंट पीयूष कृष्णा ने सर्पदंश के प्रमुख लक्षण और बचाव के उपाय बताए।उन्होंने जानकारी दी कि सर्पदंश के बाद पीड़ित व्यक्ति को काटने वाली जगह पर दांतों के दो निशान,तेज जलन,सूजन, उल्टी,जी मिचलाना,अंगों में सुन्नता,बेहोशी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में प्राथमिक उपचार के तौर पर पीड़ित को शांत रखना चाहिए और उसे हिलने-डुलने से रोकना चाहिए, क्योंकि चलने से जहर तेजी से फैलता है।काटे गए अंग को हृदय के स्तर से नीचे रखें और आभूषण,घड़ी या टाइट कपड़े तुरंत उतार दें,क्योंकि सूजन आ सकती है। जितनी जल्दी हो सके,पीड़ित व्यक्ति को पास के सरकारी अस्पताल ले जाएं जहां एंटी-वेनम उपलब्ध हो और वैक्सीन लगवाएं। उन्होंने कैडेट्स को यह भी बताया कि सर्पदंश के समय किन बातों का ध्यान नहीं रखना चाहिए। कभी भी झाड़-फूंक या तांत्रिक के चक्कर में समय बर्बाद न करें। घाव को काटने या जहर चूसने की कोशिश न करें। काटे हुए स्थान पर कसकर पट्टी (टूर्निकेट) न बांधें और सांप को पकड़ने का प्रयास न करें। वरिष्ठ समाजसेवी और डॉ. राम मनोहर लोहिया शिक्षा एवं ग्रामोद्योग सेवा संस्थान की कार्यकारी डायरेक्टर श्रीमती अनीता ने बताया कि भारत में सांप के काटने से होने वाली अधिकांश मौतें जागरूकता की कमी और सही समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण होती हैं। उन्होंने बताया कि भारत में दो प्रकार के सांप पाए जाते हैं, जहरीले और बिना जहर वाले, जिनमें से केवल 15 प्रतिशत सांप ही जहरीले होते हैं, जबकि शेष 85 प्रतिशत सांपों में जहर नहीं होता है। इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान जूनियर एवं सीनियर डिवीजन एनसीसी कैडेट्स के साथ-साथ एनसीसी अधिकारी रवि दत्ता, आपदा विशेषज्ञ दीपक, रश्मि मेम, कुलदीप अग्निहोत्री, निधि गुप्ता, सोनम, पूजा गुप्ता, अंशिका और शिवानी सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।

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