पश्चिम चंपारण के 192 विद्यालयों ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए समग्र शिक्षा मद में आवंटित राशि का 50 प्रतिशत भी अब तक खर्च नहीं किया है। सत्र की तीन तिमाही पूरी होने और चौथी तिमाही शुरू होने के बावजूद यह स्थिति बनी हुई है। इसे गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है और संबंधित विद्यालयों तथा सीआरसी (क्लस्टर रिसोर्स सेंटर) से स्पष्टीकरण मांगा है। राशि आवंटन को लगभग ढाई माह बीत चुके जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत विभिन्न मदों में राशि खर्च करने के लिए ड्राइंग लिमिट कार्यालय स्तर से पहले ही निर्धारित कर दी गई थी। राशि आवंटन को लगभग ढाई माह बीत चुके हैं, फिर भी 192 विद्यालयों ने 50 प्रतिशत से कम राशि का उपयोग किया है। डीईओ बोले-राशि का उपयोग न करना मनमानी डीईओ ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि समय पर राशि का उपयोग न करना मनमानी, कार्य के प्रति लापरवाही, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा और अनुशासनहीनता दर्शाता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि राशि का समय पर व्यय न होने से उसके दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। डीईओ ने कॉम्प्लेक्स रिसोर्स सेंटर (सीआरसी) के समन्वयकों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों की समीक्षा करें। उन्हें 10 जनवरी तक सीआरसी स्तर पर जारी सभी ड्राइंग लिमिट के विरुद्ध कम से कम 75 प्रतिशत राशि का व्यय सुनिश्चित करने को कहा गया है। विद्यालयों से यह भी विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है कि निर्धारित समय सीमा में राशि क्यों खर्च नहीं की गई। शिक्षा विभाग का मानना है कि समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाली राशि का समय पर उपयोग विद्यालयों के बुनियादी ढांचे, शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही बरतने वाले विद्यालयों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आगे सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
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