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संभल में पांच दिवसीय श्रीराम कथा शुरु:महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी बोले- रामकथा से विवेक जागृत होता है, धर्म से ही कल्याण मिलेगा


                 संभल में पांच दिवसीय श्रीराम कथा शुरु:महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी बोले- रामकथा से विवेक जागृत होता है, धर्म से ही कल्याण मिलेगा

संभल में पांच दिवसीय श्रीराम कथा शुरु:महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी बोले- रामकथा से विवेक जागृत होता है, धर्म से ही कल्याण मिलेगा

संभल के बहजोई स्थित जिला कलेक्टट्रेट के बड़ा मैदान में पांच दिवसीय श्रीराम कथा का शनिवार शाम 4 बजे शुभारंभ हुआ। कथा का समापन रात्रि 8:30 बजे हुआ। प्रथम दिन निरंजन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने रामकथा के महत्व और उसके आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामकथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला एक दिव्य माध्यम है। इसका मूल उद्देश्य व्यक्ति को भवसागर से पार कराना और उसे धर्म के मार्ग पर स्थापित करना है। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने बताया कि रामकथा का पूर्ण लाभ तभी मिलता है, जब इसे विधिवत और निरंतर श्रवण किया जाए। उन्होंने कहा कि कथा का नौ दिनों तक आयोजन इसलिए किया जाता है, ताकि श्रद्धालु इसके गूढ़ अर्थ और जीवनोपयोगी संदेश को भली-भांति समझ सकें। उन्होंने ‘रामायण सतकोटि अपारा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण के अनगिनत स्वरूप हैं। विभिन्न संतों और विद्वानों ने अपने-अपने तरीके से रामकथा का वर्णन किया है, लेकिन सभी का मूल संदेश एक ही है—धर्म की स्थापना और आत्मकल्याण। स्वामी जी ने कहा कि शब्दों और वर्णन शैली में भिन्नता हो सकती है, लेकिन कथा का तात्पर्य और उद्देश्य सदैव एक रहता है। मनुष्य को अपने धर्म को समझना और उसे जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है। श्रीकृष्ण के उपदेश ‘स्वधर्मे निधनं श्रेयः, परधर्मो भयावहः’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अपने धर्म का पालन करना ही सच्चा कल्याण है। उन्होंने कहा कि रामकथा ‘मुद मंगलमय’ है, जो जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता का संचार करती है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ रामकथा का श्रवण करता है, उसके हृदय में भगवान राम के साथ-साथ भगवान शिव का भी वास होता है। रामकथा व्यक्ति के भीतर छिपे अज्ञान को दूर कर उसे ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर सज्जनों की रक्षा करते हैं और दुष्टों का विनाश करते हैं। यह सनातन सत्य है, जो हर युग में देखने को मिलता है। सत्संग के महत्व पर जोर देते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि बिना सत्संग के विवेक की प्राप्ति संभव नहीं है। “बिनु सत्संग विवेक न होई” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सत्संग ही मनुष्य को सही और गलत का बोध कराता है और उसे सद्बुद्धि प्रदान करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सत्संग की प्राप्ति भी भगवान की कृपा के बिना संभव नहीं है। यूपी की शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी, डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया, बीजेपी जिलाध्यक्ष चौधरी हरेंद्र सिंह रिंकू, सीडीओ गोरखनाथ भट्ट, एडीएम प्रदीप वर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष ओमवीर सिंह खड़गवंशी, पूर्व केंद्रीय दर्जा राज्यमंत्री मंजू दिलेर, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री यूपी सरकार साध्वी गीता प्रधान, भाजपा जिला महामंत्री शिल्पी गुप्ता, जिला कोषाध्यक्ष अंकित जैन, जिला उपाध्यक्ष विकास वार्ष्णेय, बीजेपी चेयरमैन राजेश शंकर राजू सहित कथा के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ रामकथा का श्रवण किया। आयोजन स्थल पर व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं और क्षेत्र में आध्यात्मिक माहौल बना रहा।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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