संभल के 800 साल पुराने सिद्धपीठ चामुंडा मंदिर में चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर मां दुर्गा के भवन को फूलों से सजाया गया, जिससे एक भव्य ‘फूलों का बंगला’ तैयार हुआ। महाआरती में 700 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए, जबकि पूरे दिन में 5000 से अधिक भक्तों ने देवी के दर्शन किए। गुरुवार को संभल कोतवाली कस्बा क्षेत्र के मोहल्ला हल्लू सराय स्थित इस प्राचीन मंदिर में मुख्य यजमान शुभम गुप्ता और नैंसी गुप्ता ने आरती की। उन्होंने छप्पन भोग का प्रसाद भी चढ़ाया। नवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने कन्या-वरुओं को भोजन कराया, यह परंपरा रामनवमी के दिन भी जारी रहेगी। महाआरती का आयोजन रात्रि 07:30 बजे शुरू होकर 09 बजे संपन्न हुआ। महाअष्टमी का दिन मां महागौरी की पूजा के लिए समर्पित होता है। मां महागौरी को शांत, सौम्य और श्वेत वर्ण का माना जाता है, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक हैं। ऐसी मान्यता है कि उनकी पूजा से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति आती है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। श्रद्धालु सुधीर गर्ग ने इस दिन को रामनवमी से जोड़ते हुए कहा कि सभी ने अपने व्रत खोले। प्रतिज्ञा गर्ग ने बताया कि आज भगवान रामचंद्र का जन्म हुआ है और मंदिर प्रांगण में उत्सव के साथ महाआरती हो रही है। मंदिर महंत मुरली सिंह ने जानकारी दी कि यह मंदिर संभल शहर के बसने के समय से सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कुलदेवी मां चामुंडा का है। मुस्कान नामक श्रद्धालु ने बताया कि वह मां की सेवा में हैं और यह आठवां नवरात्र है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस मंदिर में संभल के अलावा दिल्ली, मुरादाबाद, रामपुर और अन्य स्थानों से भी भक्त दर्शन करने आते हैं। मंदिर परिसर में नौ दिवसीय मेला भी लगा हुआ है, जहां मां ज्वाला देवी से लाई गई दिव्य ज्योत के दर्शन भी श्रद्धालु कर रहे हैं।

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