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संभल के धनेटा सोतीपुरा के मुस्लिमों ने ईद नहीं मनाई:हाईकोर्ट की अनुमति के बावजूद 15 लोगों ने पढ़ी नमाज, गांव में फोर्स तैनात

संभल के धनेटा सोतीपुरा गांव में मुस्लिम समुदाय ने ईद का त्योहार नहीं मनाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद चर्चा में आई गौसिया मस्जिद में ईद की नमाज तय समय पर अदा नहीं हो सकी। इमाम की अनुमति मिलने के बाद दोपहर में केवल 15 लोगों ने नमाज पढ़ी। शनिवार को देशभर में ईद मनाई गई, लेकिन संभल की चंदौसी तहसील के धनेटा सोतीपुरा गांव में सुबह 8 बजे होने वाली नमाज पुलिस-प्रशासन की अनुमति के अभाव में टल गई। प्रशासन ने शुरुआत में इमाम के बिना केवल 15 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी। इस विरोध के चलते मुस्लिम समाज के लोग नमाज के लिए मस्जिद नहीं गए और उन्होंने ईद का त्योहार भी नहीं मनाया। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पूरा गांव छावनी में तब्दील रहा। सुबह से लेकर शाम 3 बजे तक फोर्स तैनात रही। इस दौरान एएसपी कुलदीप कुमार, एएसपी आलोक भाटी, डिप्टी कलेक्टर विकास चंद्र, थाना हयातनगर इंस्पेक्टर उमेश सोलंकी और क्राइम इंस्पेक्टर सत्यवीर सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। ग्रामीण मुनाजिर खान ने बताया कि ईद खुशी का त्योहार है, लेकिन उन्होंने नमाज अदा नहीं की। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में सभी को नमाज की अनुमति थी, लेकिन प्रशासन ने केवल 15 लोगों को ही अनुमति दी। सुबह 8 बजे होने वाली ईद-उल-फितर की नमाज दोपहर करीब 2:30 बजे अदा की गई। मुनाजिर खान ने कहा कि पहले इमाम साहब को नमाज पढ़ाने से रोका गया था। बाद में प्रशासन ने अपने आला अधिकारियों से बात करने के बाद इमाम को अनुमति दी, जिसके बाद 15 लोगों ने नमाज पढ़ी। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें केवल ‘परिवार के लोगों’ के लिए हुए आदेश का पालन कराना है। समय पर नमाज न होने के कारण समुदाय ने ईद का त्योहार नहीं मनाया। जानें पूरा मामला… गौसिया मस्जिद को धार्मिक स्थल मानने से इलाहाबाद हाईकोर्ट बेंच ने इंकार कर दिया है, लेकिन वर्ष 1995 चली आ रही परंपरा को जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी व्यक्ति को उसके निजी परिसर में पूजा पद्धति करने से नहीं रोका जा सकता है चाहे वह किसी भी धर्म से संबंधित व्यक्ति क्यों ना हो। थाना हयातनगर क्षेत्र के गांव धनेटा सतीपुरा की गाटा संख्या 291 पर बनी कथित गौसिया मस्जिद से जुड़ा है। बीती 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट बेंच के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने मुनाजिर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता। अगर डीएम राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण विश्नोई को लगता है कि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। 16 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट बेंच ने संभल की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के जिला प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को नमाज के समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने का आदेश दिया है।यदि कोई व्यक्ति नमाज में बाधा डालता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने याचिका में कहा था कि पिछले साल फरवरी में हयातनगर थाने से पुलिसवाले आए। कहा कि सिर्फ 20 लोग ही मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं। एक बार में 5-6 लोग ही नमाज अदा करें। इसके बाद मुनाजिर ने 18 जनवरी, 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 27 फरवरी को पहली सुनवाई हुई। आज 16 मार्च को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। दरअसल, हयातनगर गांव में 2700 से ज्यादा लोग रहते हैं। यहां 450 वर्गफीट में गौसिया नाम की मस्जिद है। प्रशासन के मुताबिक, जमीन का गाटा नंबर- 291 है। डॉक्यूमेंट्स में यह जमीन मोहन सिंह और भूराज सिंह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर दर्ज है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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