संभल के विवादित धार्मिक स्थल के निकट कब्रिस्तान की आठ बीघा भूमि पर हुए निर्माण मामले में 10 अप्रैल को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) न्यायालय में सुनवाई होगी। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल प्रशासन द्वारा जारी नोटिस पर 25 मार्च को स्थगन आदेश दिया है। यह पूरा मामला संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित श्रीहरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद के निकट स्थित आठ बीघा कब्रिस्तान भूमि से संबंधित है, जिसका गाटा संख्या 32/2 है। सलमा रानी पत्नी शहाबुद्दीन निवासी कोर्ट ने न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन संभल में वाद दायर किया है। वाद में नगर पालिका परिषद संभल के अधिशासी अधिकारी, यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सीईओ, उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से जिलाधिकारी, तहसीलदार संभल और जिलाधिकारी संभल को पक्षकार बनाया गया है। न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन ने 27 मार्च को मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय दिया था। इससे पहले 27 फरवरी को याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ललित कुमार ने यथास्थिति का निर्णय दिया था। इसके बाद 9 मार्च और 16 मार्च को भी सुनवाई हुई थी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रिंस शर्मा ने बताया कि उनके द्वारा अपना जवाब दाखिल कर दिया गया है। यह मामला पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था, जहां बेंच ने याचिकाकर्ता को कोई राहत न देते हुए वापस तहसील संभल भेज दिया था। हालांकि, मामला दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा और 25 मार्च को हाईकोर्ट ने संभल प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस पर स्थगन आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 6 मई को निर्धारित की गई है। श्रीकल्कि सेना (निष्कलंक दल) के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष त्यागी एडवोकेट ने जिलाधिकारी को शिकायत देते हुए बताया था कि 1990 से पहले यह पूरी तरह से कब्रिस्तान था। उन्होंने आरोप लगाया कि 1989 में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनने के बाद इस कब्रिस्तान पर अवैध कब्जा किया गया। शिकायत के बाद, एसडीएम के आदेश पर तहसीलदार-नायब तहसीलदार सहित 26 कानूनगो-लेखपालों की एक टीम गठित कर 30 दिसंबर को भूमि की पैमाइश की गई थी। प्रशासन की ओर से कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण करने की शिकायत के बाद यह पैमाइश की गई थी।

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