नव संवत्सर के पावन अवसर पर धर्मनगरी अयोध्या स्थित संकट मोचन हनुमान किला में आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण व्याप्त है। परम तपोनिष्ठ संत बर्फानी दादा महाराज के आशीर्वाद एवं पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में यहां श्रीराम महायज्ञ, नवाह पारायण, राम नाम संकीर्तन और श्रीराम कथा का भव्य आयोजन प्रारंभ हो गया है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त में विधि-विधानपूर्वक पंचांग पूजन, वेदी पूजन एवं अरणी मंथन के माध्यम से अग्निदेव का आवाहन किया गया। तत्पश्चात “श्रीराम” महामंत्र के उच्चारण के साथ हवन कुंड में आहुतियां अर्पित की जाने लगीं। यज्ञाचार्य आचार्य कुलदीप तिवारी ने बताया कि इस अनुष्ठान में सवा लाख श्रीराम महामंत्र की आहुतियां समर्पित की जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि इस महायज्ञ का शुभारंभ वर्ष 2010 में श्रीराम मंदिर निर्माण में आने वाली बाधाओं के निवारण के संकल्प के साथ किया गया था, जो अब अपने 16वें वर्ष में भी उसी आस्था और उत्साह के साथ निरंतर जारी है।
मंदिर परिसर के नव निर्मित प्रांगण में आयोजित संध्या कालीन कथा में व्यासपीठ से महंत गणेश दास महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का अवतार धर्म, मर्यादा और विश्व शांति की स्थापना के लिए हुआ था। वर्तमान समय में श्रीराम कथा मानव जीवन को दिशा देने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राम और उनके अनन्य भक्त हनुमान ही ऐसे आदर्श हैं, जो समाज में व्याप्त अशांति को शांति में परिवर्तित करने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम के संयोजक महंत परशुराम दास महाराज ने संतों का स्वागत करते हुए कहा कि सभी कार्य प्रभु श्रीराम की कृपा और हनुमान जी की प्रेरणा से ही संपन्न हो रहे हैं। अनुष्ठान के समापन अवसर पर मुख्य यजमान महंत जयराम दास महाराज ने आरती उतारी और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।इस अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत, श्रद्धालु एवं शिष्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरा परिसर राम नाम के संकीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय हो उठा है।

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