चित्रकूट के जानकीकुंड में श्री सदगुरु गौ सेवा केंद्र का वार्षिक उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। परमहंस संत श्री रणछोड़ दास महाराज की प्रेरणा से संचालित यह केंद्र श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के अंतर्गत आता हैं। इस कार्यक्रम में रामकथा व्यास पूज्य महाराज श्री मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास जी महाराज, ट्रस्टी श्रीमती रूपल बेन, संचालिका ऊषा जैन, ट्रस्टी डॉ. इलेश जैन, मिलोनी बेन, पूज्य दमयंती बेन, पूज्य रमाबेन हरियाणी सहित देशभर से आए गुरुभाई-बहन और गौभक्त शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ संतों के पूजन और गौ माता की आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर गौ माताओं को 108 व्यंजनों का भव्य अन्नकूट भोग अर्पित किया गया। केंद्र की संचालिका उषा जैन ने बताया कि श्री सदगुरु गौ सेवा केंद्र विगत 30 वर्षों से गौ माता की सेवा में समर्पित है। यह केंद्र असहाय, बीमार और बेसहारा गायों की सेवा के लिए स्थापित किया गया था।
वर्तमान में यहां 1300 से अधिक गौमाताएं निवास कर रही हैं, जिनकी देखभाल, पोषण और चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की जाती है। उन्होंने बताया कि इस केंद्र की स्थापना 1998 में स्वर्गीय अरविंद भाई मफतलाल की प्रेरणा से की गई थी। ट्रस्ट द्वारा गौ सेवा को पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता से जोड़ा गया है। यह गौशाला न केवल गायों का आश्रय स्थल है, बल्कि गौ-काष्ठ और गौ-आधारित उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रही है।
पूज्य महाराज मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास ने अपने उद्बोधन में कहा कि गौ सेवा सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण अंग है। भारतीय संस्कृति में गौ माता को विशेष स्थान प्राप्त है, क्योंकि उनमें 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष विशद भाई, ट्रस्टी श्रीमती रूपल बेन, पद्मश्री स्व. डॉ. बी.के. जैन, डॉ. इलेश जैन, डॉ. विष्णु भाई, मनोज भाई और रघु भाई सहित अन्य सभी ट्रस्टियों के योगदान को सराहनीय बताया गया। गौशाला के समर्पित कार्यकर्ताओं एवं गौपालकों की सेवा भावना की भी सराहना की गई, जो हर परिस्थिति में गौ माता की सेवा में तत्पर रहते हैं।अंत में, श्रीमती जैन ने सभी गौभक्तों से आह्वान किया कि वे गौ माता की रक्षा एवं सेवा के लिए आगे आएं और इस पुण्य कार्य को अपनी अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प लें।

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