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श्री जगदीश नारायण ब्रह्मचर्याश्रम बना संस्कृत, संस्कृति और साधना का केंद्र

प्रखंड के लगमा स्थित श्री जगदीश नारायण ब्रह्मचर्याश्रम इन दिनों आध्यात्म, शिक्षा और संस्कृति का संगम बनकर उभर रहा है।आश्रम परिसर में नवनिर्मित भव्य श्री राम मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर में प्रभु श्रीराम दरबार की मनोहारी प्रतिमा, शेष-शय्या पर आसीन पद्मनाभ स्वामी तथा श्री रामानंदाचार्य का अलौकिक विग्रह श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति प्रदान कर रहा है। वहीं, चैतन्य कुटी, लगमा में विराजमान श्री राधा–कृष्ण का युगल विग्रह,श्री चैतन्य महाप्रभु एवं श्री नित्यानंद प्रभु के भव्य स्वरूप भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। आश्रम परिसर में स्थित परमपूज्य गोलोकवासी ब्रह्मचारी जी का समाधि स्थल श्रद्धा और साधना का प्रमुख स्थल है। ब्रह्मचर्याश्रम में गुरुकुल परंपरा के अनुरूप अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था है। यहां केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली द्वारा संचालित संस्कृत विद्यालय में प्रथमा से उत्तरमाध्यमा (कक्षा 8 से 12) तक शिक्षा दी जाती है। साथ ही आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में उपशास्त्री से आचार्य (बीए–एमए समकक्ष) तक संस्कृत माध्यम से पढ़ाई होती है। इसके अतिरिक्त कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संचालित उपशास्त्री महाविद्यालय में इंटर स्तर की पढ़ाई संस्कृत में कराई जाती है। बिहार सरकार द्वारा संचालित श्री शंकर संस्कृत उच्च विद्यालय में प्रथमा से मध्यमा तक शिक्षा दी जा रही है। आश्रम की विशेषता यह है कि यहां प्रतिदिन गुरुकुल परंपरा के अनुसार नित्य संध्या वंदन, पूजन, आरती, हवन एवं भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।


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