अयोध्या में विश्व शांति और मानव कल्याण के पावन संकल्प के साथ धर्मपथ स्थित श्री संकट मोचन हनुमान किला में आयोजित श्रीराम महायज्ञ अपनी आध्यात्मिक ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। अब तक यज्ञ में 51 हजार आहुतियाँ समर्पित की जा चुकी है। पूर्णाहुति से पूर्व सवा लाख आहुतियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह महायज्ञ केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और साधना का विराट संगम बन गया है। नवाह पारायण, राम नाम संकीर्तन और श्रीराम कथा के त्रिवेणी संगम में स्नान कर श्रद्धालु आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं। इस दिव्य आयोजन का संचालन परम तपोनिष्ठ संत बर्फानी दादा महाराज के आशीर्वाद व पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में हो रहा है। अष्टमी और नवमी के पावन अवसर पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रसाद व्यवस्था की गई है। उल्लेखनीय है कि यह धार्मिक परंपरा विगत 16 वर्षों से निरंतर चली आ रही है और हर वर्ष इसकी भव्यता में नया आयाम जुड़ता है। इस वर्ष 16वें श्री राम महायज्ञ में देश के कोने-कोने से संत, महंत और श्रद्धालु बड़ी संख्या में सहभागिता कर रहे हैं। महंत परशुराम दास महाराज ने बताया कि इस महायज्ञ की शुरुआत मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ हुई थी, जो आज विश्व शांति और समग्र मानवता के कल्याण का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि युद्ध जहां सभ्यता को विनाश की ओर ले जाता है, वहीं सनातन धर्म संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है। इस वर्ष का संकल्प विश्व में व्याप्त अशांति को समाप्त कर शांति स्थापित करना है। श्रीराम कथा के दौरान महामंडलेश्वर गणेश दास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में समाज से प्रेम और सौहार्द का क्षय हो रहा है। ऐसे समय में रामचरितमानस की कथा अमृत कलश के समान है, जो मानव हृदय में पुनः प्रेम और शांति का संचार कर सकती है। उन्होंने सभी से भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। कथा के विश्राम बेला में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया और प्रसाद वितरण के साथ वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा। यह महायज्ञ न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि मानवता को जोड़ने का एक जीवंत प्रयास भी है।

Leave a Reply