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श्रीराम कथा में वन गमन और भरत चरित्र का वर्णन:राजन जी महाराज के सीता-सीता-सीता राम गाइये, राधे-राधे-राधे श्याम गाइये भजन पर श्रद्धालु हुए भावविभोर

रायबरेली के फिरोज गांधी कॉलेज मैदान में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के सातवें दिन ‘श्रीराम वन गमन’ और ‘भरत चरित्र’ प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरा परिसर भक्ति में सराबोर हो गया। कार्यक्रम में संजय गांधी स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान, लखनऊ के निदेशक एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. राधा कृष्ण धीमान ने भी शिरकत की। उन्होंने व्यासपीठ पर विराजमान पूज्य राजन जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कथा का शुभारंभ शाम 6:15 बजे भव्य आरती के साथ हुआ। राजन जी महाराज ने अपने प्रसिद्ध भजन “सीता-सीता-सीता राम गाइये, राधे-राधे-राधे श्याम गाइये” की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। रात 9:30 बजे तक चले प्रवचन में उन्होंने भगवान राम के आदर्शों और भरत के निस्वार्थ प्रेम की व्याख्या की। प्रवचन के दौरान महाराज जी ने पारिवारिक मूल्यों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति चाहे कितना भी सक्षम क्यों न हो, उसे अपने माता-पिता के सामने सदैव विनम्र रहना चाहिए। उनके अनुसार, माता-पिता के प्रति सम्मान और सरलता ही जीवन में सच्चा आशीर्वाद दिलाती है। सातवें दिन की इस श्रीराम कथा ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत कर दिया।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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