श्रीराम कथा में भरत के समर्पण का वर्णन:चित्रकूट प्रसंग में श्रोताओं ने सुना भाई का त्याग
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श्रीराम कथा में भरत के समर्पण का वर्णन:चित्रकूट प्रसंग में श्रोताओं ने सुना भाई का त्याग
पिलखुवा के मोहल्ला चाह डिब्बा में आयोजित श्रीराम कथा में चित्रकूट प्रसंग का वर्णन किया गया। इस दौरान कथावाचक ने भरत के त्याग और श्रीराम के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा पर प्रकाश डाला। कथावाचक रामकेश सिंह तोमर ने बताया कि भगवान श्रीराम के वनवास जाने के बाद भरत ने अयोध्या का राजसिंहासन स्वीकार करने से मना कर दिया था। वे चित्रकूट पहुंचे और श्रीराम से अयोध्या लौटकर राज संभालने का आग्रह किया। तोमर ने भरत के इस समर्पण और भाई के प्रति प्रेम को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि भरत ने सिंहासन पर श्रीराम की खड़ाऊं रखकर स्वयं को उनके सेवक के रूप में स्थापित किया और मर्यादा का पालन किया। प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्चा धर्म त्याग, समर्पण और मर्यादा में ही निहित है। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालु पूरी तल्लीनता से कथा का श्रवण करते रहे। इस अवसर पर डॉ. विपिन मित्तल, तन्मय मित्तल, श्रेया मित्तल, सुधीर गोयल, अखिलेश मित्तल, अजय गोयल, वीर सैन बंसल, राजेंद्र मित्तल, जगदीश शर्मा, रामनिवास शर्मा, परमात्मा शरण, राजवीर सिंह, पवन सिंघल, सीता राम और हरि कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
