प्राइवेट स्कूल कॉलेज शिक्षक संघ ने सरकार से वित्त विहीन शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा और पेंशन सहित कई महत्वपूर्ण माँगें की हैं। उन्होंने पहले हवन किया। इसके बाद सब शिक्षक एकत्र होकर औघड़नाथ मंदिर पहुंचे और दर्शन करते हुए विशेष पूजा अर्चना की। संघ का कहना है कि वित्त विहीन शिक्षक लगातार शोषण और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति में सुधार लाना आवश्यक है। संघ की प्रमुख मांगों में सभी वित्त विहीन शिक्षकों (प्राइमरी से लेकर डिग्री और व्यावसायिक शिक्षकों तक) को सरकार द्वारा कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, संघ ने 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर न्यूनतम 25,000 रुपये और 20 वर्ष की सेवा पूरी करने पर न्यूनतम 40,000 रुपये की पेंशन देने की भी मांग की है। तीसरी महत्वपूर्ण मांग ‘निजी शिक्षा वेतन वितरण अधिनियम’ पारित करने की है। इस अधिनियम के तहत, वित्त विहीन विद्यालयों/कॉलेजों में छात्रों से प्राप्त कुल फीस का 85 प्रतिशत हिस्सा शिक्षकों सहित समस्त स्टाफ को वेतन के रूप में वितरित किया जाना सुनिश्चित किया जाए। प्राइवेट स्कूल कॉलेज शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत वशिष्ठ त्यागी ने इन मांगों को उठाया। त्यागी, जो एमएलसी स्नातक मेरठ-सांधपुर सीट से प्रत्याशी भी हैं, ने कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं हो सकती और शिक्षकों की दयनीय स्थिति पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। त्यागी ने वित्त विहीन शिक्षकों की समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जहां सरकारी स्कूलों में एक शिक्षक को डेढ़ लाख रुपये तक वेतन मिलता है, वहीं अधिक योग्य वित्त विहीन शिक्षक कम वेतन पर 24 घंटे पढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति शिक्षकों के साथ-साथ छात्र और किसान परिवारों को भी प्रभावित कर रही है। संघ ने मुख्यमंत्री से इन मांगों को शीघ्र पूरा करने का विनम्र निवेदन किया है ताकि वित्त विहीन शिक्षक समाज में सम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें।

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