शाहजहांपुर में सीबीएसई के नए शैक्षणिक सत्र से पहले किताबों की उपलब्धता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शहर के एक प्रमुख विद्यालय की प्रिंसिपल कल्पना सिंह ने इस विषय पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रिंसिपल सिंह ने जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि किताबों पर एकाधिकार खत्म कर उन्हें उचित मूल्य पर आम लोगों तक पहुंचाना एक सकारात्मक कदम है, जिससे अभिभावकों को राहत मिलेगी। हालांकि, प्रिंसिपल ने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यालय इस दिशा में सहयोग करना चाहते हैं, लेकिन सीबीएसई के दिशानिर्देशों और समयबद्ध निर्णयों के कारण उनके हाथ बंध जाते हैं। उनके अनुसार, इस वर्ष कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किया गया है। सीबीएसई सत्र 1 अप्रैल से शुरू होना है, लेकिन अभी तक संबंधित किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। एनसीईआरटी की किताबें भी ‘अंडर प्रोसेस’ बताई जा रही हैं, जिससे छात्रों, अभिभावकों और विद्यालयों में भ्रम की स्थिति है। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए निजी प्रकाशकों की किताबें बाजार में उपलब्ध हो रही हैं, जो खुद को नए पाठ्यक्रम के अनुरूप बता रही हैं। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। प्रिंसिपल ने बताया कि विद्यालयों को मजबूरी में निजी प्रकाशकों की ओर देखना पड़ता है, जबकि उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि करना कठिन होता है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और छात्रों के भविष्य पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि एनसीईआरटी की किताबें समय पर उपलब्ध नहीं होती हैं, तो निजी प्रकाशकों पर रोक लगाना व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में, जब भी कोई बड़ा बदलाव किया जाए, उसकी तैयारी पहले से की जानी चाहिए और किताबें सत्र शुरू होने से पहले ही बाजार में उपलब्ध करा दी जानी चाहिए। प्रिंसिपल ने सुझाव दिया कि सरकार और संबंधित संस्थाओं को इस विषय पर गंभीरता से विचार कर ठोस समाधान निकालना चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में संतुलन बना रहे और छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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