सीतामढ़ी के बैरगनिया थाना क्षेत्र के मसहा आलम गांव में एक नवविवाहिता की कथित तौर पर दहेज के लिए हत्या कर दी गई है। यह घटना शादी के महज 28 दिन बाद सामने आई है, जब उसके हाथों की मेहंदी भी पूरी तरह नहीं उतरी थी। आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर गला दबाकर उसकी हत्या की गई। मृतका की पहचान 21 वर्षीय गुड्डी कुमारी के रूप में हुई है, जो शिवहर जिले के रसीदपुर गांव निवासी भीखर साह की पुत्री थीं। गुड्डी की शादी 4 दिसंबर 2025 को मसहा आलम गांव निवासी लखिन्द्र साह (पिता– रघुवीर साह) से हुई थी। नए व्यवसाय के नाम पर 5 लाख रुपये की मांग मायके पक्ष के अनुसार, शादी के समय 5 लाख रुपये नकद, एक होंडा मोटरसाइकिल, चेन और अंगूठी दहेज में दी गई थी। इसके बावजूद, शादी के 10 दिन बाद से ही ससुराल पक्ष ने व्यवसाय के नाम पर अतिरिक्त 5 लाख रुपये की मांग शुरू कर दी। आरोप है कि मांग पूरी न होने पर गुड्डी को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। गुड्डी का शव घर के कमरे में पलंग पर पड़ा मिला परिजनों ने बताया कि गुड्डी का शव घर के कमरे में पलंग पर पड़ा मिला। उसके गले पर निशान पाए गए हैं, जिससे गला दबाकर हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है। मायके पक्ष को सुबह करीब 5 बजे घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया। मृतका की मां सीता देवी ने आरोप लगाया है कि दहेज के लालच में उनकी बेटी की हत्या की गई है। ग्रामीण पिंटू तिवारी ने घटना को हत्या करार देते हुए कहा कि नवविवाहिता के हाथों की मेहंदी भी पूरी तरह नहीं उतरी थी। घटना के बाद से ससुराल पक्ष के सभी सदस्य फरार बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने समाज में ऐसी घटनाओं के खिलाफ संदेश देने के लिए मृतका का अंतिम संस्कार ससुराल के दरवाजे पर करने की बात कही है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा पुलिस जांच में जुटी, छापेमारी जारीघटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतका के चार भाई और दो बहन हैं। भाई मनोज कुमार ने बताया कि बार-बार दहेज की मांग के चलते उनकी बहन को प्रताड़ित किया जा रहा था।थानाध्यक्ष उमाशंकर रजक ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला दहेज हत्या का प्रतीत हो रहा है। गला दबाकर हत्या किए जाने की आशंका है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हो रही छापेमारी मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर चुकी है।दहेज प्रथा पर फिर उठा सवालहाथों की मेहंदी, सपनों से भरीआंखें और नई जिंदगी की शुरुआत—लेकिन 28 दिनों में ही सब कुछ खत्म कर दिया गया। यह हृदयविदारक घटना एक बार फिर दहेज जैसी कुप्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर करती है, जहां लालच के आगे एक नवविवाहिता की जिंदगी कोई मायने नहीं रखती।
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