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वेस्ट यूपी से अखिलेश का 2027 का चुनावी आगाज:भाईचारा समानता रैली के बहाने गुर्जरों को साधने की कवायद, वेस्ट यूपी की 40 सीटों पर बड़ा असर

समाजवादी पार्टी नोएडा के दादरी से पश्चिमी यूपी में 2027 का चुनावी आगाज करने जा रही है। रविवार को होने वाली इस रैली को भाईचारा समानता रैली नाम दिया गया है। खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस रैली में मुख्य अतिथि होंगे। उनके साथ वेस्ट यूपी के सभी बड़े गुर्जर चेहरे भी होंगे। बेशक मंच पर पीछे लगे बैनर पर भाईचारा समानता रैली लिखा गया है। लेकिन रैली में पूरा फोकस गुर्जरों पर है। चुनाव से पहले सपा पश्चिमी यूपी में गुर्जर बिरादरी को साधने के लिए रैली कर रही है। वेस्ट यूपी में रैली का सियासी असर क्या होगा वो पढ़िए.. 2022 में जहां मिहिर भोज प्रतिमा विवाद वहीं सपा का रैली स्थल समाजवादी पार्टी गौतमबुद्धनगर की दादरी विधानसभा में ये रैली कर रही है। दादरी में सम्राट मिहिर भोज डिग्री कॉलेज के मैदान में भाईचारा समानता रैली, पीडीए रैली कर रही है। सपा ने इस रैली के लिए वही स्थल चुना है जहां 2022 विधानसभा चुनाव से पहले सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण के समय यहां बड़ा विवाद हुआ था। इसी जगह पर 2022 से पहले सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण समारोह था। इसमें स्वयं यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ पहुंचे थे। इस दौरान प्रतिमा के पास जो शिलापट्‌ट लगा था उस पर सम्राट मिहिर भोज लिखा हुआ था। वहां गुर्जर सम्राट मिहिर भोज न लिखे होने से बिरादरी भड़क गई। देखते-देखते आंदोलन उग्र हो गया था। समाजवादी पार्टी उस जगह को रैली के लिए चुना है। ये था प्रतिमा का विवाद 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ग्रेटर नोएडा के दादरी में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर “गुर्जर” शब्द लिखे जाने को लेकर गुर्जर और राजपूत समुदाय आमने-सामने आ गए थे। सितंबर 2021 में सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रतिमा के अनावरण के दौरान यह विवाद गरमाया, जहाँ गुर्जर समाज ने खुद को राजा मिहिर भोज का वंशज बताया, वहीं राजपूत समाज ने उन्हें क्षत्रिय (राजपूत) बताया। मिहिर भोज की प्रतिमा से “गुर्जर” शब्द हटाए जाने पर गुर्जर समुदाय ने कड़ा विरोध जताया और बीजेपी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद सपा-रालोद गठबंधन ने इस मुद्दे को 2022 के चुनाव में भुनाया, खासकर जेवर विधानसभा सीट पर, जहां गुर्जर वोट बैंक को लेकर बीजेपी और विपक्ष में तनातनी रही। मंच के पीछे गुर्जर सम्राट की प्रतिमा लगाई पूरी रैली का दारोमदार सपा के प्रवक्ता राजकुमार भाटी के कांधों पर है। अखिलेश यादव ने रैली का सारा जिम्मा डॉ. राजकुमार भाटी को सौंपा है। रैली स्थल पर बड़ा डोम बनवाया गया है। चर्चा है कि यहां 65 हजार लोगों का सिटिंग अरेंजमेंट किया गया है। मंच के आगे बड़ा डी बनाया गया है। डी के पीछे 8 पऊुट ऊंचा मंच है। इसी मंच से अखिलेश यादव भाषण देंगे। मंच के ठीक पीछे गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की वही प्रतिमा लगी है। जिसपर विवाद हुआ था। केंद्रीय संचालन समिति में वेस्ट यूपी के 58 गुर्जर नेता
रैली के आयोजन में सपा की तरफ से लगभग 15 दिन पहले केंद्रीय संचालन कमेटी की लिस्ट जारी की गई थी। लिस्ट में सपा के 58 गुर्जर नेताओं के नाम थे। ये नाम गुर्जर बिरादरी से वर्तमान विधायक, सांसद, मंत्री, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों के साथ सक्रिय गुर्जर नेताओं के हैं। इसमें इकरा हसन, अतुल प्रधान, मुखिया गुर्जर, नाहिद हसन, पूर्व मंत्री जगवीर गुर्जर, पूर्व सांसद हरीश पाल, नीरजपाल, कर्मवीर गूमी, सुधीर भाटी, गजराज नागर, सुरेंद्र नागर, उदयवीर सहित तमाम नाम हैं। रैली का संयोजक सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी को बनाया गया। अब एक्सपर्ट्स की राय पढ़िए.. गुर्जर अपनी शक्ति दिखाना चाहते हैं
सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट पुष्पेंद्र शर्मा कहते हैं कि गुर्जर, जाट वेस्ट यूपी में दो ऐसी जातियां हैं जो संख्याबल के आधार पर सारी सीटें नहीं जिता सकतीं, लेकिन राजनीति में अपनी भागीदारी निभाने और अपनी मांगें मनवाने में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसी जातियों को हर दल अपने साथ रखना चाहता है। हाल ही में इसको लेकर गुर्जरों ने मुखालफत भी की थी। एक तरफ अपनी शक्ति बढ़ाने और दूसरी तरफ अपनी भागीदारी निभाना भी है। इस रैली से ऐसा नहीं होगा कि ये सब सपा पर चले जाएंगे, ये इतने बुद्धिजीवी हैं कि हर दल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहते हैं। इस तरह की रैलियों से एक माहौल बन जाता है। एक तरफ सपा के समर्थन में रैली कर रहे हैं दूसरी ओर थ्रेट भाजपा को जा रही है। सपा को ये फायदा
पुष्पेंद्र आगे कहते हैं कि इस रैली से सपा को फायदा होगा कि गुर्जर भी पीडीए में आ गए ये माहौल बनेगा, इसका दबाव भाजपा को पड़ेगा। भाजपा भी तुष्टीकरण में जुटेगी। चुनाव में कम समय रह जाता है तो एक प्रेशर प्रैक्टिस चलती है। चूंकि पश्चिम बहुत इंपोर्टेंट है। क्योंकि यहां की आवाज दूरतलक जाती है। गुर्जर लामंबद होता है तो इसका लाभ सपा को मिलेगा। वेस्ट यूपी में दादरी, नोएडा, लोनी, कैराना, कांधला, गंगोह नकुड बेल्ट, हस्तिनापुर सीट, मेरठ दक्षिण, पर गुर्जर प्रभावी है। सपा पहले दाव चल रही है तो जो धारणा बनेगी वो प्रभावी है। जो पहले मारे सो मीर वो लाभ लेगा। ये ठाकुरों को जबाव देने की कोशिश है। आगे कहते हैं कि सपा की इस गुर्जर रैली के बाद जल्द ही भाजपा पश्चिमी यूपी से किसी बड़े गुर्जर चेहरे को केंद्रीय मंत्रीमंडल में भी जगह मिल सकती है। क्योंकि तुष्टीकरण के लिए अब भाजपा भी बड़ा दाव चलेगी। 2.पश्चिम में सपा यादवों की भरपाई गुर्जरों से करेगी
सीनियर जर्नलिस्ट राजेश शर्मा के अनुसार अब गुर्जर सपा की ओर आ सकता है। क्योंकि वेस्ट यूपी मे ंसपा के पास यादवों का वोटबैंक तो है नहीं। इसलिए गुर्जरों पर ताकत लगा रहे हैं। ताकि वेस्ट यूपी में उन्हें बल मिल जाए, क्योंकि यहां सपा पर यादव या अन्य किसी जाति का कोई वोटबैंक नहीं हैं। पिछली बार लोकदल से पैक्ड था तो उसका वोटबैंक मिला है। लेकिन सारा गुर्जर उनके पास आएगा नहीं जहां जो पार्टी टिकट दे देगी अधिकांश गुर्जर उसकी तरफ चले जाते हैं वो दल नहीं जाति देखता है गुर्जर, जो भी पार्टी गुर्जर को टिकट देगी वो उसके साथ जाएगा। जो बड़ा होगा उसके साथ जाएंगे। गुर्जर उधर डायवर्ट होगा जहां वो देखेंगे कि अन्य जातियां कोन सी हैं। गुर्जर कम्युनिटी 2014 में हिंदू हो गए थे, 2014 में भी हिंदू हो गए लेकिन 2022 में वो बिरादरी में बँट गए सोमेंद्र पर चले अतुल प्रधान पर चले गए 2027 में भी यही हालात है। 3. सपा, गुर्जरों में यादव वोट तलाश रही
आजाद समाजपार्टी के राष्ट्रीय महासचिव गुर्जर नेता रविंद्र भाटी कहते हैं कि आसपा ने गुर्जरों के लिए जितना किया और सोचा है उतना कोई दल नहीं सोच सकता है। कर तो कभी सकता ही नहीं है। गुर्जरों के हर आंदोलन, लडाई में आसपा अग्रिम रही उनके साथ खड़ी रही है। आगे कहते हैं कि वेस्ट यूपी में सहारनपुर, मुरादाबाद, मेरठ तीन मंडलों में कोई जिला ऐसा नहीं जहां गुर्जर न हो। जाटों के बराबर संख्या कहते हैं। वेस्ट यूपी की 131 सीटों पर गुर्जर हराने, जिताने की हालत में है। क्योंकि यहां यादव वोट नहीं है। सपा पर यहां यादव वोट नहीं है इसलिए वो यहां ये प्रयास कर रहे हैं। उनको रिझाने के लिए। दादरी, नकुड़, हस्तिनापुर 80हजार, गंगोह, मीरापुर, जेवर, लोनी, गढ़, मेरठ दक्षिण, किठौर, खतौली, सरधना, हसनपुर, चांदपुर, देवबंद, बेहट विधानसभाओं पर खासा प्रभाव है। 16 प्रतिशत के आसपास वोटिंग गुर्जरों की पश्चिम में होती है। अब पुराने चुनावों में सपा का प्रदर्शन वेस्ट यूपी में जो रहा वो पढ़िए पश्चिमी यूपी में कैसा था 2022 और 2024 में सपा का प्रदर्शन? सपा ने 2022 में राष्ट्रीय लोकदल के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। पश्चिमी यूपी में कई सीटों पर इसका सीधा असर भी पड़ा था। शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर जैसे जिलों में सपा-रालोद गठबंधन का प्रदर्शन अच्छा रहा था। वहीं, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ जैसे जिलों में सपा गठबंधन को न के बराबर सीट मिली थी। उसे काफी संघर्ष करना पड़ा था। चुनाव के नतीजे आने के बाद रालोद सपा से अलग हो गई थी। वह भाजपा के साथ चली गई। 2024 में लोकसभा चुनाव हुए, तो सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 80 में से 43 सीट जीत कर सबको चौंका दिया था। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर जैसी सीटों पर जीत हासिल की थी। अलीगढ़, मेरठ, फर्रुखाबाद, अमरोहा जैसी सीट पर हार और जीत का मार्जिन बेहद कम था। सपा यहां हारी जरूर थी, लेकिन मार्जिन बहुत कम था। पश्चिमी यूपी की 20 सीटों पर प्रभाव
गुर्जर जाति को प्रदेश के 32 जिलों की 60 विधानसभा सीटों पर प्रभावी माना जाता है। भाजपा की बेचैनी इस वोट बैंक को साधने की है। लोकसभा के 2014 और 2019 के चुनाव में पार्टी को गुर्जरों का साथ मिला था। पश्चिमी यूपी की 20 विधानसभा सीटों पर गुर्जर वोट बैंक प्रभाव रखते हैं। इसमें गढ़, किठौर, मीरापुर, हस्तिनापुर, नकुड, सिकंदराबाद, दादरी, नोएडा, जेवर, लोनी, बागपत, पुरकाजी, कैराना, गंगोह, हसनपुर, सरधना, मांट, मेरठ दक्षिण, सिवालखास और खैर प्रमुख हैं। वेस्ट यूपी की जिन सीटों पर गुर्जर वोट बैंक प्रभाव रखते हैं…

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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