कानपुर की कानपुर छावनी विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक हसन रूमी का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसे काम कराए हैं, जिनके बारे में लोग पहले सोच भी नहीं पा रहे थे। उनका दावा है कि 40 साल से एनओसी के कारण अटकी सड़क का निर्माण कराना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल, अधूरे प्रोजेक्ट और आगामी चुनाव को लेकर खुलकर बात की। पढ़िए सवाल-जवाब… सवाल: विधायक जी, अपने कामकाज को आप कितने नंबर देंगे?
जवाब: जब कोई इंसान काम करता है और उससे नंबर देने को कहा जाता है तो वह ईमानदारी से नंबर नहीं दे पाता। मुझे नंबर देने का अधिकार मेरी जनता को है। मैंने अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी से शत-प्रतिशत काम करने की कोशिश की है। मैं अपने कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहता हूं। यहां तक कि जब मैं नहीं होता हूं तो भी कोई न कोई कर्मचारी ऑफिस में रहता है, ताकि लोगों की समस्या सुनी जा सके। सवाल: अपनी विधानसभा में सबसे बड़ा काम आपने कौन सा कराया?
जवाब: छावनी क्षेत्र में 40 साल से एक सड़क का निर्माण एनओसी न मिलने के कारण अटका हुआ था। कई प्रयास हुए लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। मेरे कार्यकाल में उस सड़क का निर्माण कराया गया और वहां सीवर लाइन भी डलवाई गई। जनता ने जिस भरोसे के साथ मुझे चुना, मैंने उसी भरोसे को निभाने की पूरी कोशिश की। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जिसे आप अभी तक नहीं करा पाए?
जवाब: सुजातगंज में एक पानी की टंकी है जो कई सालों से चालू नहीं हो पाई है। 2010 में यह टंकी बन गई थी लेकिन उससे पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। इससे हजारों लोगों को फायदा मिल सकता है। मैंने इसका लगभग 75 प्रतिशत काम पूरा करा दिया है, लेकिन अभी तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। कोशिश है कि अपने बाकी कार्यकाल में इसे भी शुरू करा दिया जाए। सवाल: अगले चुनाव को लेकर आपकी क्या दावेदारी है?
जवाब: दावेदारी की बात अलग से नहीं है। मैंने जनता के बीच रहकर काम किया है। अगर लोगों को लगेगा कि मैंने उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश की है तो वे मुझे फिर मौका देंगे। सवाल: क्या इस बार भी आपको टिकट मिलेगा?
जवाब: टिकट देने का फैसला पार्टी का होता है। लेकिन मुझे अपनी पार्टी पर पूरा भरोसा है। अगर पार्टी को लगेगा कि मैंने अच्छा काम किया है तो वह मुझे ही दोबारा टिकट देगी। सवाल: आपकी विधानसभा में हिंदू-मुस्लिम आबादी लगभग बराबर है, ऐसे में गठबंधन का क्या असर पड़ेगा?
जवाब: 2022 में भी कोई गठबंधन नहीं था और तब भी हमने चुनाव जीता। उस समय कांग्रेस का मुस्लिम उम्मीदवार भी मैदान में था। अगर आगे गठबंधन होता है तो उसका फायदा भी मिल सकता है। अभी समाजवादी पार्टी का पीडीए फॉर्मूला काफी प्रभावी है और इसका असर प्रदेश की कई सीटों पर दिखाई दे रहा है।

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