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विधानसभा में चैलेंज करने वाले मंत्रियों दावा झूठा:डिप्टी सीएम बोले- भू माफियाओं का सफाया होगा; बिल्डरों ने 200 फ्लैट की जमीन हड़पी, 100 करोड़ की ठगी

‘मार्च 2026 तक राज्य से भू-माफियाओं का सफाया कर दिया जाएगा। बालू और शराब माफियाओं की तर्ज पर भू-माफियाओं के खिलाफ भी बड़ा एक्शन लेकर उनका सफाया किया जाएगा। अवैध कब्जा, फर्जीवाड़ा और दहशत फैलाने वालों की खैर नहीं होगी। सुशासन के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। भू-माफियाओं और अफसरों की सांठगांठ को तोड़ा जाएगा..।’ विधानसभा में यह दावा बिहार के डिप्टी सीएम और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा ने किया। जहां से कानून बनता है, वहां से भू-माफियाओं के खिलाफ पहली बार इतना बड़ा चैलेंज किया गया है। मंत्री के दावों पर भास्कर की पड़ताल में भू-माफियाओं के साथ अफसरों के कनेक्शन का बड़ा खुलासा हुआ। रेरा के अधिकारियों से मिलकर भू-माफियाओं ने 100 से अधिक डॉक्टरों सहित 200 लोगों के फ्लैट की जमीन ही हड़प ली है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए बिहार में घर का सपना दिखाकर लूटने और अफसरों से सेटिंग कर जमीन चोरी करने वाले भू-माफियाओं की कहानी..। 100 करोड़ से अधिक के स्कैम में पहले पीड़ित डॉक्टरों का दर्द घर का सपना दिखाकर 200 लोगों के साथ स्कैम किया गया है। पीड़ितों में 100 डॉक्टर्स और उनके परिवार के लोग शामिल हैं। विधानसभा में मंत्रियों के चैलेंज पर डॉक्टरों का कहना है कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से स्कैम हुआ है। जब डॉक्टर्स की नहीं सुनी जा रही है तो सरकार आम आदमी की जमीन वाले मामले को क्या सुलझाएगी। डॉक्टरों ने विधानसभा में नेताओं के चैलेंज को झूठा बताया..। फ्लैट के नाम पर पूरी तरह से एक स्कैम है। पहले तो घर नहीं बन रहा था, लेकिन जमीन थी तो उम्मीद थी कि कहीं न कहीं हमें घर मिल जाएगा। जमीन से यह भी उम्मीद थी कि पैसा वापस मिल जाएगा, लेकिन अब तो जमीन भी चुपके से दूसरे बिल्डर को बेच दी गई। इस पूरे घटना में रेरा इन्वॉल्व है। जब भी हम कोई प्लॉट देखते हैं तो सबसे पहले रेरा रजिस्ट्रेशन देखते हैं। अगर प्रोजेक्ट रेरा अप्रूव्ड है, तो लगता है, सब सही है। लेकिन यहां तो जिसके भरोसे पर बैठे थे, उसी की लापरवाही और मिलीभगत से इतना बड़ा स्कैम किया गया है। टावर T6 में मेरे पिता और बहन ने 2019 में फ्लैट बुक कराया था। 2021 तक 1.5 करोड़ का भुगतान करके रजिस्टर्ड एग्रीमेंट भी करा लिया। घर नहीं बनने की स्थिति में हमलोगों ने 2024 में रेरा में केस किया, लेकिन अब हमारे साथ धोखाधड़ी हुई है। एक साेची समझी प्लानिंग के तहत हमारे साथ स्कैम किया गया है। 2019 में मुझे अनु आनंद कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट कैपिटल सेंटर बनाने का पता चला था। मैंने भी इसी प्रोजेक्ट से एक फ्लैट बुक करा लिया। 2020 तक लगभग 30 लाख रुपए पेमेंट भी कर दिया, लेकिन काम नहीं शुरू हुआ। पूछने पर बिल्डर्स कभी कोविड, तो कभी बारिश या कभी अन्य मामला बता देता था। देखते-देखते 5 साल बीत गए, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। फिर 2025 में रेरा में केस दर्ज कराया। अब पता चल रहा है कि हमारे प्रोजेक्ट की जमीन गलत तरीके से सूर्या सिग्नेचर को दे दी गई है। सूर्या सिग्नेचर का बिल्डर उस फ्लैट की बुकिंग भी कर रहा है। 200 लोगों का पैसा तो पहले ही फंसा था, अब सूर्या वाले ने नए लोगों को इस फ्रॉड में ढकेल दिया है। यहां तो डबल स्कैम हो रहा है। मेरे पति ने कैपिटल सेंटर के T6 टॉवर जिसे प्रीमियम बताया गया, उसमें 2019 में फ्लैट बुक कराया था। 30 लाख पेमेंट भी कर दिया। मैं हमेशा अपने फ्लैट की स्थिति देखने जाया करती थी, काम ना शुरू होने की स्थिति में 2024 में मैंने अनु आनंद कंस्ट्रक्शन पर केस दर्ज कराया। पति के साथ एक दिन फ्लैट की स्थिति देखने गई, तो दंग रह गई। अनु आनंद कंस्ट्रक्शन के साइट पर कोई काम नहीं हो रहा था, बगल में सूर्या नेस्टबिल्ट के प्रोजेक्ट का काम चल रहा था। टावर T6 की जमीन को सूर्या नेस्टबिल्ट वालों ने अपने प्रोजेक्ट में मिलाकर नया प्रोजेक्ट शुरू कर दिया। पता चला कि ये जमीन सूर्या नेस्टबिल्ट को दे दी गई है। अब सूर्या नेस्टबिल्ट इस पर नए प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट्स की बुकिंग कर रहा है। रेरा में इसकी शिकायत की। पहले तो एक जमीन थी, जिसके लिए हम लड़ रहे थे। लेकिन अब तो जमीन ही नहीं रही, तो लड़े भी तो किसके लिए। समझ में नहीं आ रहा कितना बड़ा स्कैम हो गया। मैंने कैपिटल सेंटर के टावर T6 में फ्लैट बुक कराया था। इसके लिए 40 लाख का पेमेंट भी कर दिया। प्रोजेक्ट ना शुरू होने के कारण 2024 में केस किया। केस चल ही रहा था, इस बीच रेरा, पुराने बिल्डर और नए बिल्डर की मिलीभगत से वही जमीन किसी और प्रोजेक्ट के लिए दे दी गई। प्रोजेक्ट कैंसल करने के पहले हम लोगों को जानकारी भी नहीं दी गई। जब किसी जमीन पर एक प्रोजेक्ट चल रहा हो, फिर उसी जमीन पर रेरा कैसे दूसरे प्रोजेक्ट की मंजूरी दे सकती है। यह छोटा मोटा स्कैम नहीं है। इसमें 200 से ज्यादा लोगों का 100 करोड़ रुपया फंसा है। मैंने अनु आनंद कंस्ट्रक्शन के कैपिटल सेंटर के T6 में 2018 में फ्लैट बुक कराया था। इसके लिए 32 लाख रुपए एडवांस में भी दे दिया। दानापुर कोर्ट में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट भी करा लिया, लेकिन इस बीच कोविड आ गया। कोविड के बाद भी फ्लैट बनाना शुरू नहीं हुआ। कोविड के बाद खरीदारों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। ग्रुप में कहा गया कि आप लोग अपना अपना फ्लैट मेंशन करें। इसी बीच मेरे फ्लैट नंबर को दूसरे व्यक्ति ने मेंशन कर दिया। पता चला कि बिल्डर ने मेरे फ्लैट का एग्रीमेंट दूसरे को भी कर दिया था। बिल्डर ने एक ही फ्लैट की दो लोगों को बुकिंग कर भी स्कैम किया है। अब 100 करोड़ ठगी का पूरा स्कैम जानिए अनु आनंद कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने 2016 में दानापुर खगौल रोड पर साईं सिटी प्रोजेक्ट के लिए दानापुर कोर्ट में डेवलपमेंट एग्रीमेंट कराया। साल 2017 में प्रोजेक्ट नाम बदल कर कैपिटल सेंटर कर दिया। प्रोजेक्ट में 10 टॉवर बनाने का प्लान था, जिसमें T6 को प्रीमियम व पूरी तरह से लग्जरी बनाने का प्लान था। इसमें 200 फ्लैट बनाए जाने थे। टॉवर नंबर T6 के लिए खाता संख्या-180, खसरा संख्या- 438 की जमीन का एग्रीमेंट अनु आनंद कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने जमीन मालिकों से कर लिया। साल 2018 में रेरा में भी इस प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड कराया गया, जिसे रेरा ने अप्रूवल भी दे दिया। अनु आनंद कंस्ट्रक्शन कंपनी ने प्रीमियम बताकर साल 2019 तक सभी फ्लैट और कमर्शियल स्पेस को बेच दिया। इससे लगभग 100 करोड़ रुपए अनु आनंद कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास आ गए। लेकिन इस प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं हुआ। टॉवर T6 में एडवांस बुकिंग कराने वाले खरीददारों ने साल 2024 से 2025 तक अनु आनंद कंस्ट्रक्शन कंपनी पर अलग-अलग कई केस कर दिए। कंपनी पर वित्तीय अनियमितता के आरोप को देखते हुए रेरा ने भी सख्ती दिखानी शुरू कर दी। फ्लैट बन नहीं पा रहा था, जमीन मालिक ने भी अपने हिस्से का फ्लैट बेच दिया था। ऐसे में कंपनी पर फ्लैट के लिए लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था। 6 साल में एक ईंट भी नहीं रखी जिस प्रोजेक्ट को 2021 में पूरा होना था, उसमें 6 साल में एक ईंट भी नहीं रखी गई। इस पर फ्लैट के लिए एडवांस बुकिंग कराने वालों ने 2024 और 2025 में बिल्डर पर एक एक कर कई केस कर दिया। केस करने के बाद पैसा देने वाले दबाव बनाने लगे कि उनका पैसा वापस किया जाए, लेकिन कंपनी की सेटिंग से कोई कार्रवाई नहीं हुई। घर का सपना दिखाकर करोड़ों की ठगी करने का आरोप लगाकर एडवांस पैसा देने वाले रेरा से लेकर डीएम और एसएसपी कार्यालय का चक्कर काटने लगे। हालांकि 5 साल बाद भी कहीं से समस्या का कोई हल नहीं निकला। सेटिंग से चोरी हो गई 200 फ्लैट की जमीन साल 2022 में कंस्ट्रक्शन कंपनी ने रेरा से सेटिंग कर बड़ा गेम कर दिया। बिल्डर अनु आनंद कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट कैपिटल सेंटर के T6 को जमीन मालिक से मिलकर साल 2022 में अपने बीच हुए डेवलपमेंट एग्रीमेंट को नियमों की अनदेखी कर कैंसल करा लिया। इसके बाद साल 2023 में इसी जमीन पर बिल्डर और जमीन मालिक ने मिलकर दूसरे बिल्डर तरुण कुमार के सूर्या सिग्नेचर प्रोजेक्ट बनाने का डेवलपमेंट एग्रीमेंट करा दिया। यह पूरा खेल रेरा से रजिस्टर्ड रनिंग प्रोजेक्ट पर हुआ। रेरा की लापरवाही से रेरा में रजिस्टर्ड रनिंग प्रोजेक्ट की जमीन को बिल्डर ने बेच दिया। कैपिटल सेंटर T6 की जमीन के बगल में बन रहे सूर्या नेस्टबिल्ट लिमिटेड के प्रोजेक्ट सूर्या सिग्नेचर में ही कैपिटल सेंटर T6 की जमीन को मिला दिया गया। सूर्या सिग्नेचर के बिल्डर इसी जमीन पर दूसरा प्रोजेक्ट बनाकर बेचने की तैयारी करने लगे। इसकी बुकिंग भी शुरू कर दी गई। इस प्लान में 100 डॉक्टरों सहित 200 लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया। प्रोजेक्ट कैपिटल सेंटर के टॉवर T6 में फ्लैट की एडवांस बुकिंग कराने वाले डॉक्टर्स और अन्य लोगों ने एक ग्रुप बनाकर रेरा में शिकायत दर्ज कराई। रेरा पहले तो मामले को टालता रहा। शुरुआती दौर में मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए इसे दबाने की कोशिश की गई। इसी बीच रेरा कोर्ट ने इस मामले में गड़बड़ी देखते हुए नए प्रोजेक्ट पर अगले आदेश तक रोक लगा दिया और अनु आनंद कंस्ट्रक्शन पर 15 लाख का जुर्माना भी लगा दिया। फर्जी तरीके से रनिंग प्रोजेक्ट को करा दिया कैंसिल अनु आनंद कंस्ट्रक्शन के कैपिटल सेंटर सहित अन्य कई प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हुआ था। इधर रेरा की भी कार्रवाई अनु आनंद कंस्ट्रक्शन पर चल रही थी। इस मामले में ईओयू भी जांच कर रही थी। अनु आनंद कंस्ट्रक्शन कंपनी फ्लैट बनाने की स्थिति में नहीं थी। इस बीच ठगी का बड़ा प्लान रचा गया और बड़ा गेम कर दिया गया। इस ठगी के 4 सूत्रधार थे। इसमें अनु आनंद कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर बिमल कुमार, सूर्या नेस्टबिल्ट लिमिटेड के डायरेक्टर तरुण कुमार और तीनों जमीन मालिक अजय कुमार, अनूप कुमार और साहिल कुमार शामिल हैं। प्लान के तहत 2018 में जमीन मालिक और बिमल कुमार ने कैपिटल सेंटर के नाम से कोर्ट में डेवलपमेंट एग्रीमेंट कराया था। इसकी वैधता 15 फरवरी 2023 तक थी। प्लान के तहत फर्जी तरीके से 20 दिसंबर 2022 को एग्रीमेंट कैंसल करा लिया गया। रनिंग प्रोजेक्ट वाली जमीन पर दूसरा प्रोजेक्ट जिस जमीन पर टॉवर T6 बनना था, उसी जमीन पर भूस्वामी और सूर्या नेस्टबिल्ट लिमिटेड के डायरेक्टर तरुण कुमार ने 8 फरवरी 2023 को नए प्रोजेक्ट सूर्या सिग्नेचर का एग्रीमेंट करा लिया। फिर इसी जमीन पर दानापुर नगर निगम की अनदेखी कर पीएमएए से नक्शा भी पास करा लिया गया। रेरा की लापरवाही और निगरानी ना करने के चलते रनिंग प्रोजेक्ट की जमीन पर नए प्रोजेक्ट के साथ डेवलपमेंट एग्रीमेंट कर लिया गया। नए प्रोजेक्ट के फ्लैट्स की बुकिंग भी शुरू कर दी गई। नए प्रोजेक्ट्स में भी लोगों ने फ्लैट बुक कराना शुरू कर दिया। फ्लैट के लिए एडवांस देने वालों को भनक तक नहीं लगी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले उसका एग्रीमेंट कोर्ट में रजिस्टर कराया जाता है। इसमें जमीन मालिक और बिल्डर की जरूरत पड़ती है। वहीं किसी रनिंग प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन को कैंसल करने के लिए सबसे पहले रेरा से अनुमति लेनी पड़ती है। साथ ही जमीन मालिक और बिल्डर के अलावे उस प्रोजेक्ट के सभी खरीदारों की रजामंदी भी जरूरी होती है। जबकि इस प्रोजेक्ट को कैंसल करने में किसी खरीदार को शामिल नहीं किया गया और ना हीं उनको इसकी कोई जानकारी दी गई। उल्टे जमीन मालिक ने दूसरे बिल्डर से दूसरे नए प्रोजेक्ट के नाम पर डेवलपमेंट एग्रीमेंट करा लिया। नक्शा पास कराने में फर्जीवाड़ा सूर्या सिग्नेचर प्रोजेक्ट के लिए तरुण कुमार ने नक्शा बनवाया। नक्शा लेकर तरुण दानापुर नगर निगम पहुंचा। निगम ने नक्शा पास करने से मना कर दिया। निगम का कहना था कि जिस जमीन पर पहले से किसी दूसरे प्रोजेक्ट का नक्शा पास है, उसी जमीन पर दूसरे प्रोजेक्ट का नक्शा पास नहीं किया जा सकता। तरुण कुमार ने बड़ी चालाकी से नक्शा को पटना मेट्रो पॉलिटियन एरिया ऑथोरिटी से पास करा लिया। रेरा का प्रोजेक्ट को लेकर नियम जानिए रियल एस्टेट में रेगुलेशन और डेवलपमेंट का काम रेरा मॉनिटर करती है। अगर कोई रनिंग प्रोजेक्ट कैंसल होता है तो रेरा एक्ट के सेक्शन 15 के तहत रेरा ही जवाबदेह है। साथ ही रेरा को खरीदारों के पैसों की भी रक्षा करनी होती है। खरीदार से लिए गए पैसे का 70% हिस्सा एक अलग बैंक अकाउंट में रखना होता है। रेरा को देखना है कि बिल्डर उस पैसे को उसी प्रोजेक्ट में लगाए। बिल्डर समय से फ्लैट नहीं देते हैं तो उस स्थिति में रेरा ही खरीदार को ब्याज सहित रिफंड दिलवाती है। रेरा बिल्डर को फाइन के साथ प्रोजेक्ट छोड़ने का विकल्प दे सकती है। रेरा की लापरवाही से हुई ठगी रेरा में जिस जमीन पर कैपिटल सेंटर T6 के लिए रजिस्ट्रेशन कराया गया था। कैपिटल सेंटर T6 के कई खरीदारों ने बिल्डर पर फ्लैट ना बनाने को लेकर केस कर रखा है। अनु आनंद कंस्ट्रक्शन को रेरा ने डिफॉल्टर श्रेणी में भी डाल दिया था। इतनी बड़ी गड़बड़ी के बावजूद भी रेरा लापरवाह रही। इस प्रोजेक्ट की प्रॉपर मॉनिटर नहीं किया गया, जिसके चलते रेरा के रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की जमीन को नए प्रोजेक्ट को दे दिया गया। यह पूरे तरीके से एक बड़ा स्कैम है। सोच समझकर किया गया बड़ा अपराध है। इसमें जमीन मालिक, अनु आनंद कंस्ट्रक्शन और सूर्या सिग्नेचर शामिल है। इसमें रेरा एक्ट के सेक्शन 15 का वायलेशन साफ दिख रहा है। रेरा का काम ही होता है, प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट की निगरानी करना। 2018 के प्रोजेक्ट को अगर रेरा ने प्रॉपर निगरानी की होती तो आज ये नौबत नहीं आती। पहले फ्लैट नहीं बनाया गया और अब जमीन को बेचा दिया गया। रेरा में रहते हुए कुछ बिल्डर ये सब गलती कर रहे हैं। जिस बिल्डर को चेयरमैन ने रेरा में कंसीलिएशन फोरम का मेम्बर नियुक्त किया, उसी बिल्डर के प्रोजेक्ट में चोरी से रनिंग प्रोजेक्ट की जमीन मिला लिया गया। यह तो मिलीभगत वाला स्कैम हो गया। रेरा ने अपना काम सही से किया होता तो नहीं होती गड़बड़ी अनु आनंद कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर बिमल कुमार के रेरा में रजिस्टर्ड नंबर पर भास्कर की टीम ने फोन किय। लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। जब फोन रिसीव हुआ तो रिपोर्टर ने परिचय देते हुए प्रोजेक्ट कैपिटल सेंटर के बारे में पूछा। सामने से कहा गया कि नंबर गलत है, फिर फोन काट दिया गया। इसके बाद भी कई कॉल किए गए, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। सूर्या नेस्टबिल्ट लिमिट्स के डायरेक्टर से इस बारे में पूछा गया। डायरेक्टर मणिकांत ने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट में गड़बड़ी है। इसमें सब से बड़ा दोषी रेरा है। रेरा ने अपना काम नहीं किया। जिसके चलते बॉयर्स फंस गए। रेरा ने अनु आनंद कंस्ट्रक्शन को कई जगह इलीगल तरीके से बेनिफिट दिया है। जहां तक बात रही कैपिटल सेंटर T6 की जमीन का तो मुझे जमीन मालिक ने अंधकार में रख कर एग्रीमेंट कराया। जब मामला सामने आया तो मैंने रेरा में भी लिख कर दिया है कि जमीन मालिक ने मुझे अंधकार में रखा और ये गड़बड़ी हुई। रेरा से इस मामले की जानकारी लेने के लिए रिपोर्टर कई बार रेरा ऑफिस गए। लेकिन वहां किसी से मुलाकात नहीं हो पाई। जिससे हुई उसने इस बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद रेरा के ऑफिशियल मेल पर मेल भेज कर भी इस मामले की जानकारी लेनी चाही, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट बोला- दिवालिया बिल्डरों की मदद कर रहा रेरा हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने भी रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) की कार्यप्रणाली पर फटकार लगाते हुए कहा कि यह संस्था दिवालिया होने वाले बिल्डरों की मदद करने के अलावा कुछ नहीं कर रही है। अब समय आ गया है कि सभी राज्य इसके गठन पर दोबारा विचार करें। मामला हिमाचल प्रदेश से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान का है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने रेरा की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिन लोगों के हितों की रक्षा के लिए रेरा बनाया गया था, वे पूरी तरह उदास, निराश और हताश हैं और उन्हें कोई प्रभावी राहत नहीं मिल रही। कोर्ट ने यहां तक कहा कि यदि इस संस्था को समाप्त भी कर दिया जाए, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। सुनवाई के दौरान जब पीठ को बताया गया कि रेरा में एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की गई है, तो मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि कई राज्यों में ऐसी संस्थाएं रिहैबिलिटेशन सेंटर बन गई हैं। जमीन से जुड़े 46 लाख मामले पेंडिंग बिहार में जमीन से जुड़े 46 लाख मामले पेंडिंग हैं। यह खुलासा उप मुख्यमंत्री व राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खुद विधानसभा में की है। उन्होंने बताया कि विभाग के पास कुल 46 लाख आवेदन लंबित हैं। इनमें से अकेले 40 लाख आवेदन परिमार्जन से संबंधित हैं। बरौली विधायक मंजीत कुमार सिंह ने असर्वेक्षित भूमि का मुद्दा सदन में उठाते हुए कहा, कई जिलों में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया नहीं हो पा रही है। जमीन के लिए सबसे अधिक मर्डर बिहार में बढ़ते जमीन संबंधित मामलों में घटनाएं भी तेजी से हो रही हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरों के आंकड़ों के मुताबिक भूमि विवाद में मर्डर के मामले में बिहार में सबसे अधिक हैं। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में देश में सर्वाधिक 3307 मर्डर यूपी में हुए। वहीं बिहार में 2862 हत्याएं हुई हैं। साल 2022 में बिहार में 2930 हत्याएं दर्ज की गई थीं। बिहार में हत्या दर 2.2 रही। एनसीआरबी के मुताबिक सबसे अधिक मर्डर आपसी रंजिश और दुश्मनी में हुए, जबकि 500 मर्डर जमीनी विवाद में हुए हैं। बिहार में मर्डर का दूसरा सबसे बड़ा कारण जमीन ही है, इसके बाद भी जमीन के मामलों के निस्तारण में सरकार सुस्त है। विधानसभा में चैलेंज करने वाले मंत्री की सुस्ती जानिए भू-माफियाओं के खिलाफ विधानसभा में चैलेंज करने वाले राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा शिकायतों को लेकर कितने गंभीर हैं, इसकी भी पड़ताल की गई। हमने ऐसे मामलों की छानबीन की, जिसमें कई बार पीड़ितों ने उनसे मिलकर उनके हाथ में शिकायती पत्र दिया हो। ऐसे कई मामले सामने आए, जिसमें शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ितों का आरोप है कि अब वह मंत्री तक पहुंचकर शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से निराश हो गए हैं। 30 दिन में 2 बार शिकायत, झूठा निकला आश्वासन भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम की पड़ताल में रोहतास जिले के कोचस का एक गंभीर मामला सामने आया। कोचस के रहने वाले राजेश ने उप मुख्यमंत्री व राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के दावों पर कहते हैं कि हम 30 दिनों में दो दो बार शिकायत किए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। राजेश ने बताया कि बड़ी उम्मीद के साथ हम मंत्री के दावों को सुनकर पटना पहुंचे और 6 जनवरी 2026 को उनसे मिलकर शिकायत की। आश्वासन के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 23 जनवरी 2026 को दोबारा मंत्री से मिलकर शिकायत की। 20 फरवरी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। राजेश ने बताया कि गांव के ही स्वर्गीय मारकंडे तिवारी और राधिका तिवारी की 3 बेटियां आशा, शीला और पद्मावती हैं। उन्होंने आशा तिवारी से 13 बीघा जमीन लिया। जमीन लेने के बाद पता चला कि अंचलाधिकारी कार्यालय से मिलीभगत कर पद्मावती ने 10 बीघा अपने नाम और 3 बीघा दो बेटों राहुल और निखिल के नाम कर दिया है। अंचलाधिकारी कार्यालय की मिलीभगत से पूरा खेल हुआ है, जबकि स्वर्गीय मारकंडे तिवारी और राधिका तिवारी की 3 बेटियां है तो तीनों को बराबर का हिस्सा होना चाहिए था।


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