मिर्जापुर में पौराणिक ‘महा त्रिकोण यात्रा’ का आयोजन किया गया। लगभग 25 किलोमीटर लंबी यह यात्रा भक्तों ने 12 घंटे में पूरी की, जिसमें 18 प्रमुख देवालयों में दर्शन-पूजन किया गया। यात्रा का शुभारंभ नगर के बूढ़ेनाथ मंदिर से हुआ। यहां से भक्तों का जत्था पक्काघाट पहुंचा और मां गंगा के दर्शन किए। इसके बाद यात्रा संकट मोचन, प्राचीन संकट मोचन, तारकेश्वर मंदिर, पंचमुखी महादेव, जूना अखाड़ा विश्राम स्थल, लोहंदी महावीर, काली खोह मंदिर, अष्टभुजा देवी मंदिर, नन्दजा, कंकाल काली, शिवपुर रामेश्वरम, तारा मंदिर, विंध्याचल धाम, लाल भैरों, दुग्धेश्वर, वामन मंदिर, महंत शिवाला और काली मंदिर होते हुए पुनः बूढ़ेनाथ मंदिर पर समाप्त हुई। यात्रा के दौरान भक्तों ने भजन-कीर्तन कर आदिशक्ति का गुणगान किया, जिससे पूरे मार्ग में धार्मिक माहौल बना रहा। पहली बार इस यात्रा में शामिल हुए श्रद्धालुओं ने इसे एक आध्यात्मिक अनुभव बताया और मां के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। जूना अखाड़ा के महंत डॉ. योगानंद गिरी ने बताया कि विंध्य क्षेत्र का महत्व विभिन्न पुराणों में वर्णित है और ‘महा त्रिकोण’ की परंपरा भी प्राचीन ग्रंथों में उल्लिखित है। उन्होंने कहा कि समय के साथ यह परंपरा विलुप्त हो गई थी, जिसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से पुनः प्रारंभ किया गया है। महंत डॉ. योगानंद गिरी ने यह भी बताया कि अब यह यात्रा प्रत्येक नवरात्रि के प्रथम रविवार को भव्य रूप से आयोजित की जाएगी। इसमें अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। यात्रा लंबी होने के कारण श्रद्धालु पैदल या वाहनों से भी इसमें शामिल हो सकते हैं। इस यात्रा में गौरव ऊमर, विशाल मालवीय, संदर्भ पांडेय, प्रशांत तिवारी, आशुतोष तिवारी, अमित मिश्रा, अमित पांडेय, आयुष मिश्र, कुंडल महाराज, वीरेंद्र कुमार उर्फ दिव्यानंद, वाहे गुरु, साध्वी सीता और साध्वी सीमा सहित बड़ी संख्या में भक्तजन मौजूद रहे। सभी ने भक्ति भाव से मां का स्मरण कर यात्रा को सफल बनाया।

Leave a Reply