DniNews.Live

विंध्याचल धाम में स्कंदमाता की पूजा:मां विंध्यवासिनी दरबार में उमड़ी भक्तों की भीड़, सुबह लगीं लंबी कतारें

मिर्जापुर में चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन विंध्याचल धाम में माँ स्कंदमाता की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। पंचमी तिथि पर आदिशक्ति के पांचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता के दर्शन के लिए माता विंध्यवासिनी के दरबार में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी को स्कंदमाता कहा जाता है। चार भुजाओं वाली यह देवी अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में स्थित होकर एकाग्रता प्राप्त करता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। विंध्य पर्वत और पावन गंगा नदी के संगम तट पर स्थित श्रीयंत्र पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी का आज स्कंदमाता स्वरूप में विशेष पूजन हो रहा है। कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है। माँ अपने एक हाथ में भगवान स्कंद को गोद में धारण किए रहती हैं, जबकि अन्य हाथों में कमल पुष्प और वरमुद्रा सुशोभित रहती है। विद्वान पुरोहित पं. अनुपम महाराज के अनुसार, माँ स्कंदमाता की उपासना से मन की कुण्ठाएं, द्वेष और जीवन के कलह समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि माँ को पीले वस्त्र अर्पित करने, स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार करने और केले का भोग लगाने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है। नवरात्रि के पांचवें दिन विंध्याचल धाम में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्त माँ के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। माँ स्कंदमाता के दर्शन मात्र से ही मन में सकारात्मकता, नई ऊर्जा और आत्मबल का संचार होता है। धाम “जय माँ विंध्यवासिनी” के जयकारों से गूंज रहा है और श्रद्धालु आध्यात्मिक सुख का अनुभव कर रहे हैं।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *