मिर्जापुर। चैत्र नवरात्र के नौवें और अंतिम दिन आदिशक्ति माँ दुर्गा के नवम स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर विंध्याचल धाम में भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। धार्मिक मान्यता है कि माँ सिद्धिदात्री अपने भक्तों को अष्ट सिद्धियां प्रदान कर उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती हैं। विश्वप्रसिद्ध माँ विंध्यवासिनी धाम में नवमी तिथि पर तड़के भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। पूरा धाम ‘जय माता दी’ के जयघोष से गूंज उठा। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने माँ सिद्धिदात्री के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ सिद्धिदात्री देवी दुर्गा का पूर्ण स्वरूप मानी जाती हैं। कहा जाता है कि उन्होंने भगवान शिव को अष्ट सिद्धियां प्रदान की थीं, जिसके बाद शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे अर्धनारीश्वर कहलाए। माँ का स्वरूप अत्यंत शांत और दिव्य है। वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं और उनकी चार भुजाओं में चक्र, गदा, शंख तथा कमल सुशोभित होते हैं। नवरात्र के अंतिम दिन विधि-विधान से पूजन का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर कन्या पूजन और हवन-पूजन का भी आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया तथा उन्हें भोजन व उपहार अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिरों में वैदिक मंत्रोच्चार, दुर्गा सप्तशती पाठ और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। विद्वान पुरोहित अखिलेश राजन मिश्र ने बताया कि माँ सिद्धिदात्री की कृपा से साधक को आध्यात्मिक शक्तियों की प्राप्ति होती है और वह मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होता है। पश्चिम बंगाल से आए श्रद्धालु जितेंद्र मणि त्रिवेदी और बिहार के औरंगाबाद से पहुंचे रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि भारी भीड़ के बावजूद उन्हें सुगम दर्शन प्राप्त हुए, जिससे वे प्रसन्न हैं। नौ दिनों तक चली माँ शक्ति की आराधना नवमी के साथ संपन्न हो गई। भक्तों ने माँ सिद्धिदात्री के चरणों में नमन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद अगले वर्ष पुनः इसी आस्था के साथ माँ के आगमन की प्रतीक्षा में श्रद्धालुओं ने विदा ली।

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