वाराणसी में शिया मुसलामानों ने जन्नतुल बकी (सऊदी के मदीना में स्थित कब्रिस्तान) को ध्वस्त किए जाने के विरोध में जुलूस निकाला। जुलूस में शिया मस्जिद कालीमहाल से उठकर शिया जामा मस्जिद दारानगर तक गया। इस दौरान सऊदी हुकूमत के खिलाफ जमकर विरोध दिखाई दिया। सभी के हाथों में तख्तियां थीं। सबसे आगे धर्मगुरु चल रहे थे और वो भी सऊदी हुकूमत के खिलाफ नारे लगा रहे थे। यह जुलूस अंजुमन हैदरी के जेरे इंतजाम निकाला गया था। जिसमें सैकड़ों लोग मौजूद रहे। इस दौरान अमेरिका और इजराइल मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए। अंजुमन हैदरी के प्रेसिडेंट सैय्यद अब्बास मुर्तुजा शम्सी के निर्देशन एवं जनरल सेक्रेटरी नायब रजा के संयोजन में चल रहे इस जुलूस में बनारस की सभी मातमी अंजुमनों ने शिरकत की। देखिये जुलूस की तस्वीरें… जुलूस उठने से पहले हुई मजलिस
जनरल सेक्रेटरी नायब रजा ने बताया – जुलूस निकलने से पहले कालीमहल की मस्जिद में शाद सीवानी और जैन बनारसी ने अपने कलाम पेश किए। तकरीर करते हुए मौलाना तौसीफअली ने कहा कि जब रसूल के इस दुनिया से पर्दा फरमाने के बाद उनकी इकलौती बेटी जनाबे सैय्यदा को इतना सताया गया कि उनको मर्सिया पढ़ना पड़ा और आज के 103 साल पहले मदीना स्थित उनके मकबरे को जमीदोज कर दिया गया। आज हम उसी ज़ुल्म के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। सऊदी हुकूमत ने किया जुल्म
नायब रजा ने बताया – 103 वर्ष पूर्व इस्लामी माह शव्वाल की 8 तारीख को सऊदी अरब की तत्कालीन हुकूमत नें पैगम्बर मुहम्मद साहब की इकलौती बेटी जनाबे सैय्यदा और 4 इमामों की कब्रों पर बने आलीशान रौजों को बुलडोजर चला कर गिरा दिया था। जिससे पूरी दुनिया में मुहम्मद साहब के परिवार से आस्था रखने वालों में गम और गुस्से की लहर दौड़ गई थी। 102 साल से बनारस में उठ रहा जुलूस
नायब रजा ने बताया – विगत 102 साल से आज तक बनारस में अंजुमन हैदरी के तत्वाधान में विरोध स्वरूप एक जुलूस उठाया जाता है।और सऊदी सरकार से उन रौजे के पुनर्निर्माण की मांग की जाती है एवं राष्ट्रपति के नाम हस्ताक्षरित मेमोरेंडम भेजा जाता है कि महामहिम यूनाइटेड नेशंस के माध्यम से सऊदी अरब की सरकार पर दबाव बनवा कर उन रौज़ों के पुनर्निर्माण का रास्ता सशक्त करें। गूंजा अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद का नारा
इस दौरान शिया मुसलमानों ने कालीमहाल, शेख सलीम फाटक, नई सड़क, दालमंडी, चौक, नीचीबाग, बुलानाला, मैदागिन, होते हुए दारानगर जामा मस्जिद पहुंचा। इस दौरान अमरीका और इजरायल मुर्दाबाद के नारे लगाए गए और सऊदी हुकूमत के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी हुई।

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