वाराणसी में चोलापुर क्षेत्र के अमरपट्टी गांव में दूसरे दिन शुक्रवार को नवरात्रि के अवसर पर वैष्णो कुटिया में आयोजित वार्षिक श्रृंगार उत्सव के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। जिसमे खौलते दूध से स्नान किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा। नवरात्रि के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा पारंपरिक कराहा पूजन किया गया। इस अनुष्ठान को क्षेत्र में लंबे समय से धार्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता रहा है, जिसमें श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। देखिए तस्वीरें.. आस्था और परंपरा का संगम स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह अनुष्ठान भक्तों की आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इसे माता के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करने का माध्यम मानते हैं। कार्यक्रम के दौरान “जय माता दी” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंजता रहा। इस आयोजन को देखने के लिए चोलापुर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजन स्थल को सजाया गया था और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रबंध किए गए थे।अनुष्ठान के समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह आयोजन वर्षों से धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बना हुआ है। मंदिर के पुजारी शंभू भगत और उनके बेटे अमर देव ने बताया कि पिछले छह वर्षों से यहां करहा का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। सुबह करीब 9 बजे 201 महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। इसके बाद माता वैष्णो का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। इस दौरान माता को दूध के पांच घड़ों से स्नान कराया गया और विशेष श्रृंगार किया गया। सैकड़ों श्रद्धालु रहे मौजूद
कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचे। खासकर जौनपुर, भदोही और गाजीपुर से भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। एक दिन का रहा विशेष धार्मिक आयोजन
मां वैष्णो का वार्षिक श्रृंगार और करहा का यह विशेष कार्यक्रम एक दिन तक चला। पूरे दिन मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया।

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