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लोहिया जयंती पर अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि:बोले- राज्यसभा सांसद ने जो गोरखपुर हत्याकांड पर सवाल उठाए है वो किसको बचा रही

समाजवादी विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया की 116वीं जयंती पर सोमवार को अखिलेश यादव लखनऊ के लोहिया पार्क पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने गोरखपुर हत्याकांड समेत कई मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा और संजय निषाद और ओपी राजभर के बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, ” भाजपा चुनाव आयोग के माध्यम से कितनी भी बाधाएं लगाए लेकिन पश्चिम बंगाल की जनता पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार को ही चुनेगी। पश्चिम बंगाल में हर स्तर पर ममता बनर्जी ने काम किया है”

लोहिया को श्रद्धांजलि, समाजवादी विचारों को किया याद
अखिलेश यादव ने लोहिया पार्क पहुंचकर डॉ. राम मनोहर लोहिया को पुष्पांजलि अर्पित की और उनके विचारों को याद किया। उन्होंने कहा कि लोहिया जी ने समाज में समानता और न्याय के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी प्रासंगिक है। समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

गोरखपुर हत्याकांड पर सरकार से मांगा जवाब
मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने गोरखपुर हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक राज्यसभा सांसद द्वारा दिए गए बयान“नंगा कर दूंगा” पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह साफ होना चाहिए कि आखिर किसे बचाने की कोशिश की जा रही है। सरकार को पारदर्शिता के साथ बताना चाहिए कि इस मामले में असल दोषी कौन है और किस पर कार्रवाई हो रही है।

राज्यसभा सांसद पर कसा तंज
अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए कहा कि यह वही राज्यसभा सांसद हैं, जिन्होंने अपनी सीट खाली की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री बने। उन्होंने इस बयान को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए और कहा कि इस तरह के बयान लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं।

फिल्मों के जरिए प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप
अखिलेश यादव ने फिल्मों को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल ऐसी फिल्में बनाई जा रही हैं, जिनके जरिए प्रोपेगेंडा फैलाने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि सिनेमा का इस्तेमाल समाज को जोड़ने के लिए होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा को थोपने के लिए।

ओपी राजभर और संजय निषाद के बयान पर प्रतिक्रिया
ओम प्रकाश राजभर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि लोहिया पार्क से कौन फूल लेकर जाता है या कौन मिलने जाता है, यह बताने की जरूरत नहीं है।
वहीं संजय निषाद के रोने के सवाल पर उन्होंने कहा कि विदाई के समय रोना स्वाभाविक होता है। इसे पश्चाताप कहा जाए या कुछ और, यह तो वही बेहतर बता सकते हैं।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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