प्रदेश सरकार ने जहां 1 अप्रैल से आउटसोर्स और संविदा कर्मियों का मानदेय बढ़ाकर न्यूनतम 16,000 रुपए करने का निर्णय लिया है। वहीं, लखनऊ डिवीजन में बिजली विभाग 326 संविदा बिजली कर्मियों को हटाने की तैयारी कर रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, ने इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन में संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। अल्प वेतन पर दिन-रात मेहनत करने वाले इन कर्मियों को सड़क पर धकेला भी जा रहा है। आउटसोर्स निगम से बिजली कर्मियों को बाहर रखने का लिखा है पत्र संघर्ष समिति ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में आउटसोर्स निगम बनाकर संविदा कर्मियों के हितों को सुरक्षा प्रदान की गई, लेकिन पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने दिसंबर में शासन को पत्र लिखकर खुद को इस निगम से अलग रखने की मांग की थी। इससे साफ है कि प्रबंधन जानबूझकर इन कर्मियों को सुरक्षा कवच से बाहर रखना चाहता है। 326 संविदा कर्मियों की छंटनी की तैयारी समिति के अनुसार, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने ‘वर्टिकल व्यवस्था’ के नाम पर हटाए गए संविदा कर्मियों की सूची तैयार की है। 1 अप्रैल 2026 से ERP व्यवस्था के तहत इन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सीमित संख्या में ही संविदा कर्मियों को रखने का फैसला लिया है। लेसा (लखनऊ इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एडमिनिस्ट्रेशन) में हालात और गंभीर हैं। अक्टूबर 2024 में 171, हाल ही में अमौसी से 25 और 56 कंप्यूटर ऑपरेटरों को हटा दिया गया। अब 1 अप्रैल से और 326 संविदा कर्मियों को सेवा से बाहर करने की तैयारी चल रही है। मानदेय बढ़ोतरी का लाभ क्यों नहीं? संघर्ष समिति ने सवाल उठाया- जब अन्य विभागों में मुख्यमंत्री के निर्देश पर संविदा कर्मियों का मानदेय बढ़ाया जा रहा है, तो पावर कॉरपोरेशन में छंटनी क्यों? यह विभाग की गहरी संवेदनहीनता है और निजीकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाने की सुनियोजित साजिश भी है। समिति ने चेतावनी दी कि बिजली कर्मियों के अथक प्रयासों से डिस्कॉम की रेटिंग सुधर रही है, फिर भी प्रबंधन ‘वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग’ के नाम पर संविदा कर्मियों की छंटनी और नियमित कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर ट्रांसफर में जुटा है। इसका असर गर्मियों में लखनऊ समेत पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से चार प्रमुख मांगें रखी–

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