लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित लाल बारादरी को लेकर प्रेसवार्त। शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जवाद , इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रवक्ता मौलाना सूफियान निजामी और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नीरज जैन ने वार्ता किया। प्रेसवार्ता का आयोजन विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रों और संगठन के द्वारा किया गया। इस दौरान लाल बारादरी को सील किए जाने पर सवाल खड़े किए। ‘LU का माहौल खराब करने की कोशिश’ मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि लाल बारादरी का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। ऐतिहासिक भवन में दशकों से मुस्लिम छात्र , शिक्षक और कर्मचारी नमाज अदा करते आ रहे थे। उसे बिना किसी पूर्व सूचना के बंद कर दिया गया ये बिल्कुल गलत है। हम भी इस विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और उस जगह पर नमाज अदा किया है। जिस तरह से लाल बारादरी बंद किया गया इससे बिल्कुल स्पष्ट है कि वहां के माहौल को खराब करने की कोशिश की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन में ऐसे लोग आ गए जो उस जगह पर राजनीति कर रहे हैं। पार्टी विशेष की विचारधारा रखते हैं इसलिए लगातार माहौल खराब किया जा रहा है। ‘गंगा जमुनी तहजीब का केंद्र’ डॉ. नीरज जैन ने कहा कि विश्वविद्यालय में हर धर्म के लोग पढ़ते है । विश्वविद्यालय परिसर में मंदिर भी बना हुआ है, ऐसे में अगर कोई नमाज़ पढ़ता है तो कोई गुनाह नहीं करता। लखनऊ यूनिवर्सिटी गंगा जमुना तहजीब के लिए जानी जाती है और पूरे विश्व में इसका नाम है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नमाज़ पढ़ने की जगह को सील करना निंदनीय है। सीलिंग की कार्रवाई से पहले प्रशासन को किसी अन्य जगह की व्यवस्था करना चाहिए थी । हम इसकी मांग करते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए इसका हल निकाले और नमाज पढ़ने की जगह उपलब्ध कराए। ‘विश्वविद्यालय कहे तो हम लोग करवाएंगे मरम्मत कार्य’ इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंडिया के प्रवक्ता मौलाना सूफियान निजामी ने कहा की हिंदू , मुस्लिम , सिख , इसाई सभी धर्म के लोग शिक्षा हासिल करते हैं। विश्वविद्यालय भाईचारा और शिक्षा का केंद्र है। इसे उन्माद की प्रयोगशाला नहीं बनानी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन जर्जर भवन की मरम्मत वक्त से करवाए। जब तक वहां जो बच्चे नमाज पढ़ते थे उन्हें नमाज अदा करने के लिए दूसरी जगह दे दी जाए।अगर विश्वविद्यालय प्रशासन के पास बजट का अभाव है तो बता दे हम लोग छात्रों के साथ मिलकर के इस आर्थिक संकट को दूर करेंगे और उसकी मरम्मत करवाएंगे।

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