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लखनऊ में साहित्यिक कार्यक्रम, प्रो. अरविंदाक्षन सम्मानित:प्रतिरोध की संस्कृति पर दिया व्याख्यान, युवा रचनाकारों ने सुनाई कविता

लखनऊ के निशातगंज स्थित कैफी आज़मी एकेडमी में एक साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जनवादी लेखक संघ, लखनऊ और डॉ. राही मासूम रज़ा साहित्य एकेडमी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन के.पी. सिंह मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट, अलीगढ़ ने किया। इसमें शहर के साहित्यकारों, कवियों और बुद्धिजीवियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का पहला सत्र ‘कुँवरपाल सिंह स्मृति सम्मान एवं व्याख्यान’ को समर्पित था। वरिष्ठ साहित्यकार रामवीर सिंह ने स्वागत भाषण दिया। नूर आलम ने प्रोफेसर ए. अरविंदाक्षन के लिए प्रशस्ति पत्र पढ़ा। इसके उपरांत, नलिन रंजन सिंह, नरेश सक्सेना और हफ़ीज़ क़िदवई सहित मंच पर उपस्थित साहित्यकारों ने प्रो. अरविंदाक्षन को सम्मानित किया। प्रतिरोध हमारी चेतना का मूल तत्व है अपने व्याख्यान ‘साहित्य की संस्कृति अर्थात प्रतिरोध की संस्कृति’ में प्रो. अरविंदाक्षन ने कहा कि प्रतिरोध हमारी चेतना का मूल तत्व है, जो हर दौर में अन्याय और विसंगतियों के विरुद्ध खड़ा होता है। उन्होंने समकालीन वैश्विक परिस्थितियों और आमजन पर उनके प्रभावों पर चिंता व्यक्त की।विभिन्न साहित्यकारों की कृतियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि साहित्य हमेशा से समाज की बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठाता रहा है। उन्होंने कुँवरपाल सिंह के रचनाकर्म को भी इसी प्रतिरोध की परंपरा का सशक्त उदाहरण बताया। युवा रचनाकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया इस सत्र में वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सीमा सिंह ने किया, जबकि हफ़ीज़ क़िदवई ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।दूसरे सत्र ‘नवांकुर’ में युवा रचनाकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। ब्रजराज सिंह यादव, नीरज, रक्षित पाण्डे, सुमय्या ख़ान और प्रदीप्त प्रीत ने अपनी रचनाओं के ज़रिए समकालीन समाज, संवेदनाओं और प्रतिरोध के स्वर को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। श्रोताओं ने उनकी कविताओं की सराहना की और तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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