डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग ने मंगलवार को ‘समाज कार्य व्यवसाय में शोध के नवीन आयाम’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने भाग लिया। लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. ए.एन. सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने उनका स्वागत किया, जबकि डॉ. रुपेश कुमार सिंह ने उनका परिचय प्रस्तुत किया। नए ज्ञान का सृजन ही शोध है प्रो. सिंह ने अपने संबोधन में शोध के महत्व को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि व्यवस्थित और क्रमबद्ध तरीके से नए ज्ञान का सृजन ही शोध है। उन्होंने शोध के विभिन्न चरणों जैसे विषय चयन, उद्देश्य निर्धारण, परिकल्पना निर्माण और शोध प्ररचना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिकल्पना के माध्यम से शोध के संभावित परिणामों का अनुमान लगाया जाता है, जिसकी बाद में पुष्टि की जाती है। उन्होंने शोध का ब्लूप्रिंट तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रो. सिंह ने निदर्शन (सैंपलिंग) को शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इसके द्वारा ही उत्तरदाताओं का चयन किया जाता है। समाज कार्य शोध में हस्तक्षेप की भूमिका महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान, प्रो. सिंह ने अपने शोध अनुभव भी साझा किए। उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिए, जिससे उन्हें विषय को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिली। विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने अंत में व्याख्यान का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि समाज कार्य शोध में हस्तक्षेप की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि शोध के निष्कर्षों के आधार पर ही समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए ठोस कदम सुझाए जाते हैं।कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्याम सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अवधेश कुमार ने दिया। इस अवसर पर डॉ. मनीष कुमार सहित विभाग के अन्य शिक्षक, छात्र और विभिन्न विभागों के शोधार्थी भी उपस्थित थे।

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