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लखनऊ में सऊदी प्रिंस सलमान की तस्वीर जलाई गई:जवाद बोले- ईरान ने भारत की जनता को तेल दिया है, भारत अमेरिका का पिट्ठू बन गया

लखनऊ में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद शिया मुसलमानों ने सऊदी अरब के शासन के खिलाफ आसिफी मस्जिद में विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सऊदी हुकूमत के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हाथों में विरोध और आतंकवाद विरोधी तख्तियां लेकर नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सऊदी के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की तस्वीर जलाकर विरोध जताया। वहीं, भीड़ ने अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब के खिलाफ नारे भी लगाए। इस दौरान जन्नतुल बकी के पुनर्निर्माण की मांग भी उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए बड़े इमामबाड़ा के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। जन्नतुल बकी के निर्माण के लिए हुआ प्रदर्शन सऊदी अरब के शहर मदीना में स्थित जन्नतुल बकी का कब्रिस्तान है। वहां पर पैगंबर-ए- इस्लाम की बेटी हजरत फातिमा जेहरा की कब्र को सऊदी शासन ने ध्वस्त कर दिया था। इसी को लेकर प्रदर्शनकारियों प्रदर्शन किया, और तोड़े गए मजारों के दोबारा बनाने की मांग की है। इसके लिए शिया मुसलमान सऊदी हुकूमत के खिलाफ हर साल आज के दिन दिन प्रदर्शन करते हैं। सऊदी हुकूमत का जमकर विरोध शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने प्रदर्शन कर रहे शिया मुसलमानों को संबोधित किया। इस दौरान सऊदी हुकूमत मुर्दाबाद के नारे लगे। मौलाना कल्बे जवाद ने सऊदी शासन की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा- जन्नतुल बकी शिया अकीदे के लिहाज से सबसे अहम कब्रिस्तान है। जब तक सऊदी अरब जन्नतुल बकी कब्रिस्तान में स्थित पैगम्बर-ए-इस्लाम की पुत्री और उनके नातियों की कब्रों को फिर से निर्माण नहीं करवा देता। तब तक हम इसी तरह सऊदी शासन के खिलाफ हर साल प्रदर्शन करते रहेंगे। ‘सऊदी अरब ने हमेशा इजराइल जैसे देशों का साथ दिया’ मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि सऊदी अरब ने हमेशा अमेरिका और इजराइल जैसे देशों का साथ दिया है, जिन्हें वह इस्लाम का दुश्मन बताते हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के शेखों की माताएं यहूदी और क्रिश्चियन धर्म से थीं, इसलिए वह उन्हें मुसलमान नहीं मानते। उनका आरोप है कि सऊदी अरब ने कभी भी मुसलमानों या मुस्लिम देशों का साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि गाजा पट्टी में लाखों मुसलमान बर्बाद हो गए, एक भी इमारत सही नहीं बची, फिर भी ये लोग खामोश रहे। 70 हजार लोगों की मौत हो गई, लेकिन किसी ने नहीं बोला। सऊदी अरब की रगों में यहूदी और ईसाई खून दौड़ रहा है, इसलिए उन्हें मुसलमानों से कोई हमदर्दी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां के कुछ मौलवी और मौलाना सऊदी अरब से पैसा लेते हैं। ईरान को लेकर कहा कि उस पर हो रहे जुल्म के खिलाफ भारत में लोगों ने बढ़-चढ़कर आवाज उठाई और मदद की। ईरान ने भले ही मदद नहीं मांगी, लेकिन भारत के लोगों ने, जिनमें हिंदू भाई भी शामिल थे, आगे बढ़कर सहयोग किया। ‘हिन्दू महिलाओं ने दिए अपने जेवर’ ईरान से भारत के लिए जो तेल और गैस आ रही है, वह सरकार की वजह से नहीं, बल्कि यहां की जनता के समर्थन का परिणाम है। भारतीय सरकार ने तेल नहीं दिलाया, बल्कि यह जनता की जीत है। पूरे भारत में अयातुल्लाह का गम मनाया गया और यहां से मदद भेजी गई, जिसके बदले तेल मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू महिलाओं ने अपने कानों की बालियां और जेवर तक दान कर दिए, जो बड़ी बात है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अमेरिका और इजराइल की समर्थक है, जबकि ईरान भारत का साथ दे रहा है। इस युद्ध में पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता के दावे पर उन्होंने कहा कि यह गलत है। कल्बे जवाद कहते हैं कि- पाकिस्तान जैसे देश, जिस पर आतंकवाद के आरोप लगते रहे हैं, वह मध्यस्थता की भूमिका नहीं निभा सकता। उन्होंने कहा कि जो देश खुद शांति स्थापित नहीं कर पा रहा, वह दूसरों को शांति का संदेश दे, यह उचित नहीं है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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