लखनऊ के अलीगंज स्थित ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र में चल रहा छह दिवसीय ‘राष्ट्रीय छापा कला शिविर’ दूसरे दिन और ज्यादा जीवंत हो गया। राज्य ललित कला अकादेमी, उत्तर प्रदेश के सहयोग से आयोजित यह शिविर ‘तृतीय प्रिंट बिनाले इंडिया’ के तहत कला प्रेमियों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। शिविर के तीसरे दिन शुक्रवार को कार्यशाला में तकनीक और रचनात्मकता का अनोखा संगम देखने को मिला। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए नौ नामी छापा कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों को आकार देना शुरू कर दिया है। कलाकारों ने जिंक प्लेटों को काटकर उन पर अम्ल-रोधी लेप चढ़ाया और फिर सुई व नुकीले औजारों से अपनी कल्पनाओं को उकेरा। नई तकनीक सीख रहे हैं इसके बाद इन प्लेटों को नाइट्रिक एसिड के मिश्रण में डाला गया, जहां अम्ल की प्रक्रिया से धातु पर गहरी रेखाएं उभरकर सामने आईं। यही रेखाएं आगे चलकर ग्राफिक कला की मुख्य पहचान बनती हैं। इस पूरी प्रक्रिया ने कार्यशाला को बेहद रोचक और शिक्षाप्रद बना दिया। शिविर की खास बात यह है कि यह पूरी तरह ‘एचिंग’ तकनीक पर केंद्रित है। पद्मश्री प्रो. श्याम शर्मा के मार्गदर्शन में कलाकार न सिर्फ नई तकनीक सीख रहे हैं, बल्कि अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एचिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि धैर्य और सूक्ष्मता की साधना है। प्रिंटमेकिंग की परंपरा को बढ़ावा देने की जरूरत डॉ. संजीव किशोर गौतम ने कहा कि इस शिविर के जरिए देश के बड़े कलाकारों की लखनऊ में मौजूदगी कला जगत के लिए बड़ी उपलब्धि है। वहीं कलाकार दिलीप तामोली ने प्रिंटमेकिंग की परंपरा को प्राचीन बताते हुए इसे बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया। डॉ. देवेंद्र त्रिपाठी के अनुसार, स्थानीय कलाकार भी इस शिविर में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं, जिससे तकनीक और शैली का सुंदर संगम देखने को मिल रहा है।यह शिविर 30 मार्च 2026 तक जारी रहेगा, जहां कला प्रेमी प्रतिदिन कलाकारों को लाइव काम करते हुए देख सकते हैं।

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