लखनऊ में अमर शहीद भगत सिंह के बलिदान दिवस पर एक विशेष संगीतमय नाट्य प्रस्तुति का आयोजन किया गया। गोमतीनगर स्थित संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में हुई इस प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों को छू लिया और उनमें आजादी की लड़ाई की भावना को जीवंत कर दिया। डा. उर्मिल कुमार थपलियाल फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत इस नाटिका का निर्देशन रितुन थपलियाल ने किया। ‘शहीदों ने लौ जलायी जो’ शीर्षक से सजी यह प्रस्तुति क्रांतिकारी गीतों का एक अनूठा संगम थी। नाटक ने दर्शाया कि कैसे आम लोगों की आजादी की चाह को क्रांतिकारियों ने शब्दों और संगीत के माध्यम से एक आंदोलन का रूप दिया। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की गूंज सुनाई दी नाट्य प्रस्तुति में ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ और ‘डायर यूं बोला चिल्लाय’ जैसे गीतों के जरिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की गूंज सुनाई दी। विशेष बात यह रही कि इसमें कई ऐसे गीत शामिल थे, जिन पर ब्रिटिश शासन ने प्रतिबंध लगा दिया था। कहानी एक ऐसी जेल के इर्द-गिर्द बुनी गई थी, जहां अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को कैद कर रखा था। कैदी मौत से डरने के बजाय उसे उत्सव की तरह मना रहे थे। गीत और संगीत के बीच उनका साहस और जुनून चरम पर दिखा। पुरुषोत्तम दादा की शहादत के बाद क्रांतिकारियों का गुस्सा फूट पड़ता है और वे जेल तोड़कर निकल जाते हैं। कलाकारों ने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया नाटक में सोम गांगुली, संजय शर्मा, आदित्य विश्वकर्मा, ऋषभ पांडे, ओमकार पुष्कर, सत्यम पांडे, अर्पित कुमार सहित कई कलाकारों ने दमदार अभिनय किया। वहीं, मंच के पीछे तकनीकी टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसने पूरे कार्यक्रम को सफल बनाया।कार्यक्रम में भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रति शंकर त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

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