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लखनऊ में बिना रिटेनिंग वॉल बेसमेंट में खोदा:पूर्व आईआरएस का घर खतरे में, बांस-बल्लियों के सहारे टिका मकान

लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में नियमों को ताक पर रखकर की गई बेसमेंट खुदाई ने एक और रिहायशी मकान को खतरे में डाल दिया है। गोमतीनगर के विनय खंड में पड़ोसी प्लॉट पर बिना रिटेनिंग वॉल बनाए गहरी खुदाई शुरू कर दी गई, जिससे बगल का मकान अब बांस-बल्लियों के सहारे खड़ा है। हालत इतनी गंभीर है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। विनय खंड-2/9 निवासी परवीन तलहा, जो पूर्व आईआरएस अधिकारी और पद्मश्री सम्मानित हैं, के मकान के पास जुलाई 2025 से 3200 वर्ग फीट प्लॉट पर निर्माण चल रहा है। आरोप है कि निर्माण शुरू होने के साथ ही नियमों की अनदेखी की गई। तलहा ने पहले ही एलडीए को शिकायत देकर मानक के अनुसार काम कराने या निर्माण रोकने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 24 मार्च को खिसकी नींव, तब जागा प्रशासन 24 मार्च को अचानक मिट्टी खिसकने से तलहा के मकान की नींव दरक गई और कई फीट मिट्टी खाली प्लॉट में जा गिरी। इसके बाद मकान को गिरने से बचाने के लिए बांस-बल्लियों का सहारा लेना पड़ा। घटना के बाद एलडीए के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सिर्फ सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) बनाने का आदेश देकर लौट गए। परवीन तलहा का कहना है कि अगर एलडीए समय रहते सख्ती करता तो आज यह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने बताया कि इस मामले में एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार और मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को भी पत्र लिखकर शिकायत की, लेकिन सुनवाई में देरी हुई। जोनल अधिकारी बोले- नक्शा पास, इसलिए कार्रवाई नहीं जोनल अधिकारी देवांश त्रिवेदी के मुताबिक, निर्माण का नक्शा पास है, इसलिए कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि उन्होंने माना कि खुदाई के साथ रिटेनिंग वॉल बनना जरूरी है और जल्द ही सुरक्षा दीवार बनवाई जाएगी। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे गोमतीनगर में जयपुरिया कॉलेज के पास भी बेसमेंट खुदाई से मकान खतरे में आ चुका है, जहां किसी तरह भवन को बचाया गया था। वहीं 2024 में नाका के आर्यनगर इलाके में बिना अनुमति बेसमेंट खुदाई के चलते दो इमारतें ढह गई थीं। बाद में एलडीए ने मामले में केस दर्ज किया था। लापरवाही भारी, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं हुई तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है। फिलहाल, एक घर बांस-बल्लियों पर टिका है और परिवार दहशत में जीने को मजबूर है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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