लखनऊ में वंचित समुदाय की किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विज्ञान फाउंडेशन ने एम्पावर–द इमर्जिंग मार्केट्स फाउंडेशन के सहयोग से संचालित ‘परिवर्तन कार्यक्रम’ के तहत दो किशोरियों को मेकअप किट प्रदान की। इस पहल का उद्देश्य उनके कौशल को आय के स्रोत में बदलना और आजीविका के अवसर बढ़ाना है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि क्षेत्र की अन्य किशोरियों और युवतियों को भी प्रेरित करना है, ताकि वे विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इस अवसर पर विभिन्न कौशलों के प्रशिक्षकों सहित कुल 75 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे कार्यक्रम और भी प्रभावी बन गया। किशोरियों ने विभिन्न कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किए परियोजना समन्वयक सुकृति मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2025 में ‘परिवर्तन कार्यक्रम’ के अंतर्गत 49 किशोरियों ने विभिन्न कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किए। इनमें से कई ने अपने छोटे व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए हैं। यह पहल की सफलता का स्पष्ट प्रमाण है। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा किशोरियों के कार्यानुभवों से संबंधित एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में मौजूद मिताश्री घोष ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास न केवल किशोरियों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। व्यावहारिक प्रयास वास्तव में परिवर्तनकारी हैं रेमंड टेलरिंग से मुस्ताक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए ऐसे ठोस और व्यावहारिक प्रयास वास्तव में परिवर्तनकारी हैं। यह पहल उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देती है और समाज में नई संभावनाओं के द्वार खोलती है। डॉक्टर रेड्डीज फाउंडेशन के दीपू ने टिप्पणी की कि ऐसे कार्यक्रम केवल कौशल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे किशोरियों में आत्मविश्वास, स्वाभिमान और अपने भविष्य को संवारने की दृष्टि विकसित करते हैं। यह पहल उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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