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लखनऊ में जून 2027 से पहले नहीं बढ़ेंगे जोन:जनगणना के चलते नगर निगम के अधिकार फ्रीज, 4 नए जोन बनाने की थी तैयारी

लखनऊ नगर निगम में फिलहाल जोन नहीं बढ़ाए जाएंगे। मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर निगम प्रशासन की तरफ से लोगों की सुविधा के लिए इसे बढ़ाने को लेकर विचार किया जा रहा था। लेकिन भारत सरकार के गृह मंत्रालय की तरफ से 31 दिसंबर को जारी शासनादेश के तहत प्रशासनिक इकाइयों के क्षेत्र में परिवर्तन नहीं हो सकता है। इसके अधिकार फ्रीज कर दिए गए थे। इससे पूरी प्रक्रिया होल्ड पर रहेगी। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से भी इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके बाद नगर आयुक्त गौरव कुमार और मेयर सुषमा खर्कवाल की तरफ से इस पर चर्चा हुई है। नगर निगम की तरफ से इसपर आगे बढ़ने से पहले ही फिलहाल रोक लग गई है। जून 2026 तक नहीं हो सकता बदलाव गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए शासनादेश में कहा गया कि 1 जनवरी 2026 से प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं के अधिकार फ्रीज कर दिए गए हैं। इसमें जून 2027 तक कोई बदलाव नहीं हो सकता है। मंत्रालय के शासनादेश में कहा गया कि शहर के वार्डों और अन्य की सूची तैयार कर ली गई है। अब इसमें परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। क्यों कि इन्हीं आंकड़ो के आधार पर शहरी क्षेत्र में स्थित प्रापर्टियों की लिस्टिंग जनगणना के लिए होगी। अप्रैल से निर्धारित 30 दिनों में किया जाएगा। मेयर ने कहा अभी सिर्फ विचार किया मेयर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि अभी सिर्फ इसपर विचार किया गया है। ताकि लोगों को अच्छी सुविधा मिले। उनका कहना है कि हम वार्डों के क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। सिर्फ जोन की संख्या बढ़ाने की तैयारी है। यह नगर निगम की आंतरिक प्रक्रिया है। ताकि प्रशासनिक काम बेहतर ढंग से किए जा सके। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि फिलहाल नए जोन नहीं बढ़ाए जाएंगे। क्यों कि जनगणना के चलते सरकार की तरफ से फिलहाल सीमाओं के अधिकार फ्रीज कर दिए गए हैं। उनका कहना है कि वार्डों को सभी जोनों में सही अनुपात में करने पर विचार किया गया था। आबादी और क्षेत्र के आधार पर तैयार होंगे जोन वार्ड को बराबर आधार पर जोनों में बांटे जाने की तैयारी है। गोमती नदी के दोनों छोर पर आने वाले वार्डों को एक ही जगह पर एक ही तरफ कर दिया जाएगा। इसमें क्षेत्रफल के साथ में आबादी के लिहाज से जोन बटेंगे। अधिकतम 11-12 जोन पूरे शहर में होंगे। फिलहाल इनकी संख्या 8 है। वर्ष 2017 के बाद यह वृद्धि की जानी थी। नगर निगम के जीआइएस (जियोग्राफिकल इनफारमेशन सिस्टम) से सर्वे में 8.39 लाख भवन पाए गए थे। इससे टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। नगर निगम की सीमा 567 स्क्ववायर किलोमीटर अब तक नगर निगम साढ़े सात लाख प्रापर्टी का टैक्स कलेक्शन कर पाया है। जबकि 88 गांव जुड़ जाने से भवनों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अब संख्या 9.50 लाख के करीब पहुंचने का अनुमान है। 2020 में शामिल हुए 88 गांवों की आबादी 2.69 लाख (जनगणना 2011) थी, जो अब बढ़कर दस लाख हो गई है। नगर निगम की सीमा फिलहाल 567 वर्गकिलोमीटर हो गई है, जबकि पहले 310 वर्ग किलोमीटर ही थी।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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