लखनऊ में बिरजू महाराज कथक संस्थान की ओर से मासिक कथक संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया गया, जिसने कला प्रेमियों को आकर्षित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुनीता मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर संस्थान की अध्यक्ष कुमकुम धर और उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी भी उपस्थित रहीं। संध्या की मुख्य प्रस्तुति डॉ. मनीषा मिश्रा ने दी। उन्होंने ‘ऊँ नमः शिवाय’ पर आधारित नृत्य से अपनी प्रस्तुति आरंभ की, जिसमें भगवान शिव के विभिन्न रूपों को दर्शाया गया। ‘कर्पूरगौरं’ और ‘जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले’ जैसे पदों पर उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इस नृत्य में राधा-कृष्ण के संबंधों को दर्शाया गया डॉ. मनीषा मिश्रा ने पारंपरिक कथक शैली में तीनताल पर ठाठ, आमद, तोड़े, परन और जुगलबंदी प्रस्तुत की। उनकी लयकारी और भावों को दर्शकों ने सराहा। कार्यक्रम का समापन दादरा ‘डगर बिच कैसे चलूं, पग रोके कन्हैया’ की प्रस्तुति से हुआ। इस नृत्य में राधा-कृष्ण के संबंधों को दर्शाया गया। संगत कलाकारों में तबले पर रविनाथ मिश्रा और आराध्या प्रवीण, गायन और हारमोनियम पर प्रवीण कश्यप और मंजूषा मिश्रा तथा सितार पर नवीन मिश्रा शामिल थे। पढ़ंत में आराध्या प्रवीण और सह-नृत्यांगनाओं के रूप में प्रेरणा विश्वकर्मा व वंशिका शर्मा ने सहयोग किया।

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