लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के सभागार में रविवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शीर्षक ‘अम्मा, मैं जागूं तुम सो जाओ…’ था। इसमें समाज और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली मातृ शक्ति को सम्मानित किया गया, साथ ही एक कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ। संस्थान की महामंत्री डॉ. सीमा गुप्ता ने अपने स्वागत भाषण में ‘अम्मा’ कार्यक्रम के उद्देश्यों ले बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखेगी। डॉ. गुप्ता ने सभी साहित्यकारों और उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके सहयोग की अपेक्षा की। विशिष्ट अतिथि पी.सी. श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में समाज निर्माण में मातृ शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को माता-पिता की छत्रछाया में ही जीवन का सबसे बड़ा सुख प्राप्त होता है।कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहीं। डॉ. सुरभि शुक्ला ने ‘नटवर नागरम्’ नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. सीमा मोदी की नाट्य प्रस्तुति ‘माँ एक चरित्र’ को दर्शकों ने खूब सराहा। इस अवसर पर डॉ. सुभदा पाण्डेय, डॉ. रश्मि दोहन, मुक्ता चंद, निर्मला सिंह, सावित्री शर्मा, वीणा बाजपेयी और उर्मिला शुक्ला को मातृ शक्ति के रूप में सम्मानित किया गया।कवि सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। इनमें डॉ. कलीम कैसर, रेनू वर्मा, नर कंकाल, श्रवण कुमार, सुभाष यादव, भालचंद्र त्रिपाठी और डॉ. सरला शर्मा ‘अस्मां’ जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरभ कान्त शर्मा ने किया। मुख्य अतिथि संगीता सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए संस्थान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अंत में, संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. उमेश ‘आदित्य’ ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ इस कार्यक्रम का समापन हुआ।

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