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लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आगाज:भारतीय ज्ञान परंपरा से बनेगा ‘विकसित भारत’ @2047, गांवों के विकास पर चर्चा


                 लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आगाज:भारतीय ज्ञान परंपरा से बनेगा 'विकसित भारत' @2047, गांवों के विकास पर चर्चा

लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आगाज:भारतीय ज्ञान परंपरा से बनेगा ‘विकसित भारत’ @2047, गांवों के विकास पर चर्चा

लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज में सोमवार से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आगाज हो गया हैं । ‘रीइमेजिनिंग सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड गवर्नमेंट थ्रू इंडियन नॉलेज सिस्टम: विजन भारत @2047’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने भारत को महाशक्ति बनाने का खाका पेश किया। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से सतत विकास और बेहतर शासन की दिशा पर गहन चर्चा की गई। मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सुनील देवधर ने स्पष्ट किया कि गांवों का विकास ही विकसित भारत की वास्तविक कुंजी है। उन्होंने कहा कि जब तक गांव समृद्ध नहीं होंगे, तब तक देश का समग्र विकास अधूरा रहेगा। देवधर ने समाज के पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए ग्रामीण विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक नागरिक की भागीदारी को अनिवार्य बताया। वेदों और आधुनिक विज्ञान का संगम नई संभावनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय ज्ञान प्रणाली की उपयोगिता पर व्यापक चर्चा हुई। टेक्सास यूनिवर्सिटी के प्रो. सुभाष सी. चौहान ने बताया कि वेदों और आधुनिक विज्ञान का संगम नई संभावनाएं खोल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के सूत्र आयुर्वेद में मौजूद हैं और हल्दी पर हो रही वैश्विक रिसर्च इसके प्रभाव को प्रमाणित कर रही है। युवाओं के लिए AI और तकनीकी कौशल आवश्यक वहीं, जॉर्जिया से जुड़ीं डॉ. तमता लेकिशविली ने युवाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी कौशल को आवश्यक बताया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. एम. एम. गोयल ने कहा कि भारत दुनिया को स्थिरता का मार्ग दिखा सकता है। उन्होंने महाभारत और गीता के उपदेशों को जीवन प्रबंधन और संतुलन का आधार बताया। लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एस. पी. सिंह ने तुलसीदास के दोहों के माध्यम से ज्ञान को एक सतत प्रक्रिया बताया, जो धीरे-धीरे व्यक्ति को पूर्ण बनाती है।उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। शाम को छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया। प्राचार्य प्रो. देवेन्द्र कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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