लखनऊ कैसरबाग बायोस्कोप में छठी प्रदर्शनी लगी। दूसरे दिन फेमिनिस्ट्स ऑफ अवध: ट्रेसिंग लखनऊ थ्रू इट्स वीमेन के साथ आयोजन किया गया । प्रदर्शनी शहर को उसकी महिलाओं के जीवन और योगदानों को दर्शाया गया। साथ महिलाओं को देखने का एक नया नजरिया दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक भागीदारी से जुड़ी महिलाओं की यात्राओं के महत्वपूर्ण स्थानों को चिन्हित किया गया है । ‘ए रूम ऑफ आवर ओन’ फिल्म की स्क्रीनिंग प्रदर्शनी के दूसरे दिन के ‘ए रूम ऑफ आवर ओन फिल्म’ का प्रदर्शन किया गया। ये फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) की छात्राओं द्वारा शॉर्ट फिल्म तैयार की गई थी। इसमें दर्शाया गया है कि महिलाएँ घर , कॉलेज , वर्किंग प्लेस , जैसे विभिन्न स्थानों को कैसे अनुभव करती हैं और उनके लिए किस प्रकार के स्थानों का निर्माण किया जाना चाहिए। निर्देशक पूर्वा नरेश ने कहा कि यह प्रोजेक्ट महिलाओं के दृष्टिकोण से स्थान, उपस्थिति और अपनेपन के अनुभवों को सामने लाता है। समाज के सामने महिलाओं की सोच और फिलिंग्स को उजागर करना जरूरी है। फिल्म में महिला यात्रा को दर्शाया गया कार्यक्रम आयोजकों द्वारा बताया गया कि ‘ए रूम ऑफ आवर ओन’ में स्मृति और मौखिक इतिहास को बहुत ही अच्छे ढंग से दर्शाया गया है। FTII में फिल्म निर्माण का अध्ययन करने वाली महिलाओं की यात्राओं और सिनेमा में महिलाओं की अनदेखी मेहनत को दर्शाया है । रीना मोहन, बीना पॉल और सुरभि शर्मा के प्रयासों से फिल्म में कविताओं के माध्यम से 50 से अधिक महिला स्नातकों की कहानियों को प्रस्तुत किया गया है।

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