लखनऊ दुनिया का का 58 वां सबसे प्रदूषित शहर है। यहां पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक की तुलना में 10 गुणा पीएम 2.5 का प्रदूषण कणों का औसत 54.2 µg/m³दर्ज किया गया है। कमजोर बुनियादी ढांचा, सड़कों पर गड्ढे उड़ती धूल, वाहनों से निकलता धुंआ और कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिश वेस्ट के चलते यह समस्या बढ़ी है। स्विट्जरलैंड की संस्था आईक्यूएयर (IQAir) की तरफ से 2025 के जारी आंकड़े के मुताबिक दुनिया के सबसे प्रदूषित 100 शहरों में 64 भारत के हैं। जबकि उत्तर प्रदेश का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यूपी के 11 और शहर शामिल हैं। यूपी के 11 शहर दुनिया में सबसे प्रदूषित लोनी टॉप पर लोनी दुनिया का नंबर एक प्रदूषित शहर है। यहां पर AQI में पीएम 2.5 का औसत WHO के मानक की तुलना में 12 गुणा अधिक है। गाजियाबाद की रैंकिंग पीएम 2.5 के औसत 89.2 के साथ में 7 वें नंबर पर है। नोएडा में पीएम 2.5 का औसत 80.5 के साथ रैंकिंग में 18 पर, ग्रेटर नोएडा में पीएम 2.5 का औसत 77.2, मुजफ्फरनगर 69.1 के साथ 29 वें नंबर पर, हापुड़ 67.1 के साथ 34 वें नंबर पर, 35 वें नंबर पर बागपत का पीएम 2.5 65.8 रहा है। 36 वें नंबर पर बुलंद शहर का औसत 64.5 रहा है। 42 वें नंबर पर मेरठ का पीएम 2.5 का औसत 61.8 रहा है। लखनऊ रैंकिंग में 58 वें नंबर पर रहा। यहां पीएम 2.5 का औसत 54.2 रहा। खुर्जा 67 वें नंबर पर रहा। यहां पर पीएम 2.5 का औसत 52.8 रहा है। कानपुर 146 और गोरखपुर 150 नंबर पर प्रदूषित शहर हैं। पूरी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के कुल 21 शहर शामिल हैं। 143 देशों का हुआ अध्ययन रिपोर्ट में 143 देशों और क्षेत्रों के 9,446 शहरों का डेटा शामिल है, जो 40,000 से ज्यादा मॉनिटरिंग स्टेशनों और सेंसरों से लिया गया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बच्चों पर वायु प्रदूषण का असर जीवनभर रहता है। जीवन के शुरुआती साल में फेफड़ों को पहुंचे नुकसान पूरी ज़िंदगी असर डालते हैं। इसके साथ ही 2025 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में पहली बार एयर पॉल्यूटेंट्स को टॉप-टियर ग्लोबल रिस्क माना गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों (हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर) का बड़ा कारण बताया। विश्व स्वास्थ्य सभा ने 2040 तक वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों को आधा करने का रोड मैप भी मंजूर किया है।

Leave a Reply