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रैली के जरिए ‘कठपुतली कला’ को बचाने का संदेश:वाराणसी में कठपुतली दिवस के मौके पर निकली रैली, सरदार पटेल की दिखायी जीवनी

शनिवार को विश्व कठपुतली दिवस के मौके पर शहर में जनजागरूकता रैली निकाली गई। रैली अंबेडकर सर्किल से रवाना हुई जो कचहरी, गोलघर और अर्दली बाजार होते हुए एलटी कॉलेज में स्थित राजकीय पुस्तकालय परिसर में पहुंची। कलकार अपने हाथों में कठपुतलियां धारण किए हुए थे और कठपुतली कला के संरक्षण के लिए जागरूक किया गया। लाइब्रेरी में कठपुतली नाट्य मंचन का आयोजन किया गया जो लौहपुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल के जीवन दर्शन पर आधारित रही। कठपुतली कला के जरिए लौहपुरुष की पूरी जीवनी दिखायी। छात्र भी यहां उपस्थित रहे। लाइब्रेरी के अध्यक्ष कंचन सिंह परिहार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को क्रिएटिव पपेट थिएटर ट्रस्ट के कलाकारों ने किया। ‘भारतीय जीवन का दर्शन है कठपुतली’ यहां पर कलाकारों का सम्मान भी किया गया। 15 कठपुतली कलाकारों को सम्मानित किया गया। लाइब्रेरी के अध्यक्ष कंचन सिंह परिहार ने कहा, कठपुतली कला हमारे भारतीय जीवन का दर्शन है। यह जीवन दर्शन इसलिए है क्योंकि मानव भी कठपुतली है। कठपुतली का नाच यह दिखाता है कि कैसे कैसे जीवन बीतता है और इंसान इस जीवन में आता है और फिर खो जाता है। कोई और है जो हमें नचाता है, जैसे एक धागे से कठपुतली नाचती है वैसे ही हम भी नाचते रहते हैं। डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा, कठपुतली कला हमारी अमूल्य विरासत है, इसे बचाने के लिए सभी को प्रयास करना होगा। यहां डॉ. अमिताभ राव, अरूण मिश्रा, डॉ. ललिता राव, ADIOS राणा ब्रजेश सिंह, आनंद कृष्ण मासूम, संजय सिंह, संतोष श्रीवास्तव सुधीर चंद्र वर्मा समेत अन्य रहे।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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