वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति के दबावों के बीच अमेरिका और भारत के रिश्तों को लेकर एक बार फिर सख्त संकेत सामने आए हैं। रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद पर लगाम नहीं लगाई, तो अमेरिका भारत पर और ज्यादा टैरिफ बढ़ा सकता है।
बता दें कि एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि वह “अच्छे इंसान” हैं और उन्हें यह मालूम था कि अमेरिकी राष्ट्रपति भारत की नीति से खुश नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि व्यापार के मामले में अमेरिका बहुत तेजी से टैरिफ बढ़ाने की स्थिति में है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर महीनों से बातचीत चल रही है, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है।
गौरतलब है कि पिछले साल अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। इनमें से करीब 25 प्रतिशत टैरिफ सीधे तौर पर रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए थे। मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका भारत पर यह दबाव इसलिए बना रहा है ताकि रूस की ऊर्जा आय को सीमित किया जा सके।
ट्रंप के बयान का असर भारतीय बाजारों में भी देखने को मिला। सोमवार को आईटी शेयरों पर दबाव दिखा और निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब ढाई प्रतिशत गिरकर एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों को आशंका है कि अगर व्यापार तनाव बढ़ता है, तो भारत-अमेरिका ट्रेड डील और ज्यादा लटक सकती है।
इस बीच रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जो ट्रंप के करीबी माने जाते हैं, ने कहा कि रूस की तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों और भारत पर ऊंचे टैरिफ का असर पड़ा है और भारत ने रूसी तेल की खरीद कुछ हद तक कम की है। उन्होंने ऐसे देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया जो अब भी रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं।
हालांकि व्यापार विशेषज्ञों की राय इससे अलग है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि भारत पहले ही 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है और रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद न होने से वह एक रणनीतिक असमंजस की स्थिति में है। उनके मुताबिक अब अस्पष्ट रुख काम नहीं करेगा और भारत को अपनी नीति को लेकर स्पष्टता दिखानी होगी।
बता दें कि भारत ने हाल के महीनों में अमेरिकी दबाव के बाद रूसी तेल आयात में कुछ कटौती जरूर की है, लेकिन इसे पूरी तरह रोका नहीं गया है। इसी बीच सरकार ने रिफाइनरियों से रूसी और अमेरिकी तेल की साप्ताहिक खरीद का ब्योरा भी मांगा है ताकि अमेरिका की चिंताओं को दूर किया जा सके।
गौरतलब है कि भारी टैरिफ के बावजूद नवंबर में भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़ा था, हालांकि मई से नवंबर 2025 के बीच कुल निर्यात में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट भी दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच टैरिफ लागू होने के बाद कम से कम तीन बार बातचीत हो चुकी है, जबकि पिछले महीने भारत के वाणिज्य सचिव ने अमेरिकी व्यापार अधिकारियों से मुलाकात की थी। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर स्थिति अब भी साफ नहीं हो पाई है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर दबाव और बढ़ सकता है।
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