मुजफ्फरपुर में साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का दुरुपयोग कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज में फर्जी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले शातिर को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान बोचहां थाना क्षेत्र के भगवानपुर निवासी नागेंद्र सहनी के पुत्र प्रमोद कुमार राज के तौर पर हुई है। साइबर डीएसपी के निर्देश पर बोचहां थाना प्रभारी श्रीकांत चौरसिया की टीम ने गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपी को साइबर थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। आरोपी के पास से एक मोबाइल बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल फर्जी वीडियो-ऑडियो तैयार करने में किया गया था। मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, पुलिस को 2 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कथित बयानों वाले वीडियो-ऑडियो तेजी से वायरल होने की सूचना मिली थी। तकनीकी जांच में स्पष्ट हो गया कि यह सामग्री पूरी तरह फर्जी, एडिटेड और एआई तकनीक से तैयार की गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी ने इंटरनेट से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सार्वजनिक भाषणों, इंटरव्यू और वीडियो क्लिप्स को डाउनलोड किया था। इसके बाद एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग टूल का उपयोग कर उनकी आवाज की हूबहू नकल तैयार की। तैयार की गई फर्जी आवाज को पहले से लिखी गई स्क्रिप्ट के अनुसार वीडियो में जोड़ा गया। चेहरे के हाव-भाव और लिप-सिंक मिलाने के लिए उन्नत एआई वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर का सहारा लिया गया, जिससे असली और नकली में फर्क करना बेहद मुश्किल हो गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पहले इस एडिटेड वीडियो-ऑडियो को अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट और मैसेजिंग ग्रुप्स में साझा किया था। इसके बाद कंटेंट तेजी से अन्य प्लेटफॉर्म पर फैलता चला गया। वीडियो पर 50 हजार से अधिक व्यू आ चुके थे। इन फर्जी डिजिटल सामग्रियों का उद्देश्य आम जनता में भ्रम फैलाना, लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास उत्पन्न करना तथा देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों की प्रतिष्ठा और विश्वास को ठेस पहुंचाना था। विशेष टीम का किया गठन मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने त्वरित संज्ञान लिया। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक (साइबर) के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान कर कार्रवाई की। साइबर थाना पुलिस ने इस संबंध में कांड संख्या-01/26 दर्ज किया है। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस आरोपी के आपराधिक इतिहास की भी जानकारी जुटा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार युवक जन सुराज से जुड़ा हुआ था। अब उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मौजूद अन्य फोटो, वीडियो और डिजिटल कंटेंट की गहन जांच की जा रही है। इसमें जन सुराज के संस्थापक समेत अन्य व्यक्तियों से संबंधित फुटेज भी शामिल हैं। वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस तरह की फर्जी डिजिटल सामग्री के जरिए राष्ट्र विरोधी भावना, अफवाह और सामाजिक अशांति फैलने की प्रबल आशंका थी। समय रहते की गई कार्रवाई से संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति को टाल दिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
पैसों के लिए वीडियो एडिट करता था साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया है कि वह पैसों के लालच में ऐसी फर्जी वीडियो एडिट करता है और अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट को सप्लाई करता है। पुलिस ने यह वीडियो @jansuraajbochaha के पेज से निकाला है। पुलिस ने वीडियो डिलीट करने को लेकर मेटा की मेल किया है। वहीं, अन्य वीडियो के बारे में भी पुलिस खंगाल रही है कि और कौन-कौन से वीडियो इसने एडिट कर वायरल किया है। एआई तकनीक के जरिए फर्जी कंटेंट बनाना गंभीर अपराध एसएसपी सुशील कुमार के अनुसार, एआई तकनीक के जरिए फर्जी कंटेंट बनाना गंभीर अपराध है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होगी। आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो या ऑडियो पर बिना सत्यापन विश्वास न करें और संदिग्ध सामग्री की सूचना तुरंत साइबर थाना या नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।
https://ift.tt/APEFB8y
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply